अमेरिका में जहरीले इंजेक्शन के दो खतरनाक डोज झेलने के बाद भी जिंदा बची महिला कैदी
अंतरराष्ट्रीय अपराध और न्याय जगत से इन दिनों एक ऐसा अजीबोगरीब और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के कानूनविदों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम लोगों को हैरान कर दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका की एक जेल में सजा-ए-मौत भुगत रही एक महिला कैदी के साथ कुछ ऐसा घटित हुआ जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने कभी की होगी। अमेरिकी न्याय प्रणाली के तहत मौत की सजा पाने वाले अपराधियों को आमतौर पर 'लेथल इंजेक्शन' यानी जहरीला इंजेक्शन देकर दुनिया से अलविदा किया जाता है, ताकि उनकी मौत दर्द रहित और त्वरित हो सके। लेकिन इस बार जल्लादों और जेल प्रशासन के सारे इंतजाम धरे के धरे रह गए जब डॉक्टरों और जेल अधिकारियों द्वारा एक के बाद एक लगातार दो खतरनाक जहरीले इंजेक्शन के डोज दिए जाने के बावजूद वह महिला कैदी मौत के मुंह से वापस लौट आई और जिंदा बच गई। इस अजीबोगरीब घटना के सामने आने के बाद से अमेरिकी न्याय विभाग, जेल प्रशासन और न्यायपालिका के गलियारों में हड़कंप मच गया है कि आखिर इस तरह की तकनीकी या चिकित्सीय चूक कैसे हो सकती है और क्या देश का कानून इस प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
जहरीले इंजेक्शन के दोहरे डोज के बाद भी शरीर में कैसे चलती रही सांसे?
इस सनसनीखेज घटना के विवरण के मुताबिक, जब तयशुदा और कानूनी रूप से अधिकृत तारीख पर उस महिला कैदी को मौत की सजा देने के लिए निष्पादन कक्ष (Execution Chamber) में लाया गया, तो प्रक्रिया के अनुसार उसे जहरीला इंजेक्शन देने की शुरुआत की गई। जेल के चिकित्सा विशेषज्ञों और तकनीशियनों की टीम ने तय प्रोटोकॉल के तहत पहला जहरीला इंजेक्शन उसके शरीर में इंजेक्ट किया। नियम के मुताबिक कुछ ही मिनटों में दवा का असर होना चाहिए था और कैदी की मौत सुनिश्चित हो जानी चाहिए थी, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब उस महिला के शरीर में मौत के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए और उसकी सांसें चलती रहीं, तो अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। स्थिति को संभालते हुए और कानूनी प्रक्रिया को किसी भी कीमत पर पूरा करने के दबाव में जेल प्रशासन ने एक और बड़ा कदम उठाया और कुछ समय के अंतराल के बाद उस महिला को जहरीले इंजेक्शन का दूसरा खतरनाक डोज भी दे दिया गया। इसके बावजूद, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और तमाम जहरीले रसायनों को मात देते हुए उस महिला का शरीर जीवित बना रहा, जिसे देखकर वहां मौजूद डॉक्टर और जेल अधिकारी भी हैरान रह गए कि आखिर ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि कोई इंसान इतने घातक जहर की दोहरी मात्रा को झेलकर भी सुरक्षित बचा रहे।
क्या इस महिला को दोबारा दी जाएगी मौत की सजा या टल जाएगी जेल की फांसी?
इस अभूतपूर्व घटना के बाद अब अमेरिका के कानूनी गलियारों और अदालतों में एक बहुत बड़ा बवंडर खड़ा हो गया है कि इस महिला का आगे क्या किया जाएगा। अमेरिकी संविधान और मानवीय कानूनों के तहत किसी भी कैदी को अत्यधिक शारीरिक यातना देना या एक ही अपराध के लिए क्रूरतापूर्ण तरीके से बार-बार प्रताड़ित करना प्रतिबंधित है, जिसे 'क्रूर और असामान्य सजा' के खिलाफ सुरक्षा माना जाता है। वकीलों और मानवाधिकार संगठनों का यह तर्क है कि जब दो बार जहरीला इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी वह महिला जीवित बच गई है, तो इसका मतलब यह है कि भगवान या किस्मत ने उसे जीवन का एक और मौका दिया है और अब उसे दोबारा इस अमानवीय प्रक्रिया से नहीं गुजारा जाना चाहिए। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष और पीड़ित परिवारों के समर्थकों का यह कड़ा रुख है कि अदालत द्वारा दिए गए मौत के फैसले को हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए और तकनीकी कमियों या शरीर की असामान्य प्रतिक्रिया के आधार पर किसी खूंखार अपराधी को खुली छूट नहीं दी जानी चाहिए। इस कानूनी पेंच ने अमेरिकी न्याय प्रणाली को एक बार फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में यह तय होना बाकी है कि इस महिला कैदी की किस्मत का फैसला कौन सा नया मोड़ लेता है।