जनरल असीम मुनीर की जिद्द ने देश में खड़ा किया अभूतपूर्व सुरक्षा और राजनीतिक संकट
पड़ोसी देश पाकिस्तान में इस समय राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक तबाही और आंतरिक गृहयुद्ध के हालात बेहद विस्फोटक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। देश के 77 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा अभूतपूर्व संकट देखने को मिल रहा है, जहां देश के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अपनी सत्ता और वर्चस्व को बनाए रखने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर जंग छेड़ रखी है। अपनी चालों के जाल में खुद उलझ चुके असीम मुनीर ने हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में शहबाज शरीफ सरकार के जरिए असंवैधानिक रूप से इमरजेंसी यानी गवर्नर रूल थोपकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की प्रांतीय सरकार को बर्खास्त कर दिया है। इस कदम के साथ ही सेना प्रमुख ने पाकिस्तान के भीतर 'पांचवां मोर्चा' (Fifth Front) खोल दिया है। राजनीतिक जानकारों और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रावलपिंडी के जीएचक्यू (GHQ) से लिए जा रहे ये मनमाने फैसले अब पाकिस्तान को पूरी तरह विघटन और गृहयुद्ध की ओर धकेल रहे हैं।
इमरान खान को झुकाने की नाकाम कोशिश और खैबर पख्तूनख्वा में बगावत की चिंगारी
असीम मुनीर के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान बने हुए हैं। विदेश भागने या सैन्य कमान से समझौता करने के सारे प्रस्तावों को ठुकराकर जेल में ही डटे रहने के इमरान खान के फैसले ने सैन्य हुक्मरानों की रातों की नींद हराम कर दी है। सेना ने भारी धांधली और दबाव के बावजूद खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई की जीत को रोकने में नाकाम रहने के बाद अब प्रांतीय सरकार को बर्खास्त करने का दांव खेला है। सेना का यह आरोप है कि केपीके सरकार आतंकवाद रोकने में विफल रही, लेकिन इस कठोर प्रशासनिक कदम ने पश्तून बहुल आबादी के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि केपीके की हालत अब धीरे-धीरे बलूचिस्तान जैसी बनती जा रही है, जहां इस्लामाबाद और रावलपिंडी के खिलाफ बंदूकें उठनी शुरू हो चुकी हैं।
पूर्व में भारत और पश्चिम में तालिबान: चौतरफा घिरे पाकिस्तान के पांचों मोर्चों का जमीनी गणित
पाकिस्तान आज एक साथ पांच खतरनाक मोर्चों पर फंसा हुआ है:
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पूर्वी मोर्चा (भारत): सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख और 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी आक्रामक रणनीति से पाकिस्तान का पूर्वी सिरा लगातार दबाव में है।
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पश्चिमी मोर्चा (अफ़गानिस्तान): तालिबान के साथ डूरंड लाइन पर रोजाना हो रही सैन्य झड़पों और एयरस्ट्राइक ने काबुल के साथ पाकिस्तान के संबंधों को हमेशा के लिए बिगाड़ दिया है।
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आंतरिक मोर्चा (बलूचिस्तान): बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का हिंसक विद्रोह लगातार पाकिस्तानी सेना के दस्तों को निशाना बना रहा है।
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सशस्त्र उग्रवाद (TTP): तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान देश के सुरक्षा बलों पर बड़े हमले कर रहा है।
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पांचवां मोर्चा (KPK व इमरान समर्थक जनसैलाब): केपीके में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद पश्तूनों और सिविल सोसाइटी में भड़की बगावत ने राजधानी इस्लामाबाद तक गृहयुद्ध का खतरा खड़ा कर दिया है।
क्या दो हिस्सों में फिर टूटने की कगार पर है पाकिस्तान? कूटनीतिक विशेषज्ञों का बड़ा विश्लेषण
जब किसी देश की सेना अपने ही नागरिकों के खिलाफ हथियार उठा लेती है और लोकतांत्रिक जनादेश को कुचलने का प्रयास करती है, तो उस देश का सामाजिक और राजनीतिक ढांचा पूरी तरह चरमरा जाता है। असीम मुनीर द्वारा खैबर पख्तूनख्वा को 'सिक्योरिटी स्टेट' में तब्दील करने का प्रयास उल्टा पड़ता दिख रहा है। पश्तून कबीले और तालिबानी लड़ाके अब एक साथ आकर इस्लामाबाद की सत्ता को खुली चुनौती दे रहे हैं। आर्थिक बदहाली, विदेशी कर्ज और चारों तरफ से घिरी सीमाओं के बीच पांचवां मोर्चा खोलना जनरल असीम मुनीर की सबसे बड़ी रणनीतिक भूल साबित हो सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि यदि यही हालात बने रहे, तो सिंधु नदी के पश्चिम का इलाका पाकिस्तान के नक्शे से अलग होकर एक नया गृहयुद्ध क्षेत्र बन सकता है।