Gorilla Skull Surgery: चिकित्सा जगत में ऐतिहासिक कारनामा! डॉक्टरों ने 12 साल के गोरिल्ला की खोपड़ी से निकाला खतरनाक इन्फेक्शन; बची जान

Gorilla Skull Surgery: चिकित्सा जगत में ऐतिहासिक कारनामा! डॉक्टरों ने 12 साल के गोरिल्ला की खोपड़ी से निकाला खतरनाक इन्फेक्शन; बची जान

चिकित्सा विज्ञान और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र से एक बेहद अद्भुत और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। अमेरिका के सैन डिएगो जू सफारी पार्क (San Diego Zoo Safari Park) में डॉक्टरों और वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम ने मिलकर दुनिया में पहली बार किसी गोरिल्ला की बेहद जटिल और दुर्लभ खोपड़ी की सर्जरी (Skull Surgery) की है।

इस ऐतिहासिक ऑपरेशन के जरिए 12 वर्षीय पश्चिमी तटीय मैदानी गोरिल्ला (Western Lowland Gorilla) 'मिजानी' (Mizani) के कान के ठीक पीछे और खोपड़ी के हिस्सों में फैले एक बेहद गंभीर और जानलेवा इन्फेक्शन को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया है।

अजीब लक्षणों के बाद हुआ जानलेवा बीमारी का खुलासा

इस ऐतिहासिक सर्जरी की शुरुआत मार्च 2026 में हुई, जब चिड़ियाघर के रखवालों ने मिजानी के व्यवहार में कुछ अजीब और चिंताजनक बदलाव नोटिस किए। मिजानी अपना मुंह पूरा खोलने से बच रहा था, उसने खाना बेहद कम कर दिया था और वह बार-बार दर्द के मारे अपने सिर को पकड़कर आंखें सिकोड़ रहा था।

गंभीरता को देखते हुए पशु चिकित्सकों ने जब सफारी पार्क के हॉर्टर वेटरनरी मेडिकल सेंटर में मिजानी का सीटी (CT) स्कैन किया, तो डॉक्टरों के होश उड़ गए। स्कैन में पता चला कि मिजानी 'मास्टोइडाइटिस' (Mastoiditis) और साइनस से पीड़ित था। यह एक ऐसा खतरनाक इन्फेक्शन है जो कान के पीछे की मास्टोइड हड्डी को गला देता है। मिजानी के मामले में यह इन्फेक्शन उसकी खोपड़ी के अन्य हिस्सों में भी फैल चुका था, जिससे उसकी जान को बड़ा खतरा था।

इंसानी डॉक्टरों और वेटरनरी डॉक्टरों की टीम ने रचा इतिहास

दुनिया के वैज्ञानिक और मेडिकल इतिहास में आज तक किसी भी गोरिल्ला पर इस तरह की सर्जरी (Mastoidectomy) करने का कोई लिखित रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। इस अनूठी चुनौती से निपटने के लिए सैन डिएगो जू के वेटरनरी डॉक्टरों ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी सैन डिएगो (UC San Diego Health) के इंसानी कान, नाक और गला (ENT) रोग विशेषज्ञों से मदद मांगी।

इंसानी खोपड़ी की सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ. जेफ्री हैरिस और उनकी टीम ने गोरिल्ला के सीटी स्कैन का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि इंसानों और गोरिल्ला की शारीरिक बनावट में समानता तो है, लेकिन उनकी खोपड़ी की हड्डियों की मोटाई और संरचना में बड़े अंतर भी हैं।

5 घंटे तक चला जटिल ऑपरेशन, मिली नई जिंदगी

इस बेहद नाजुक ऑपरेशन में डॉक्टरों, एनेस्थेटिस्ट और वन्यजीव विशेषज्ञों सहित 20 से अधिक पेशेवरों की टीम शामिल हुई।

  • माइक्रो-सर्जरी से हटाया इन्फेक्शन: लगभग 5 घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने मिजानी के सिर के बाईं ओर एक चीरा लगाया। इसके बाद बेहद बारीक टूल्स (Microsurgery) की मदद से सड़े हुए हिस्से और इन्फेक्शन को पूरी तरह साफ करके बाहर निकाला गया।

  • तेजी से हो रहा रिकवर: डॉक्टरों के अनुसार, सफल सर्जरी के बाद मिजानी की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है और वह अब बिना किसी दर्द के खाना खा रहा है।

चूंकि पश्चिमी तटीय मैदानी गोरिल्ला की प्रजाति पहले से ही लुप्तप्राय (Critically Endangered) श्रेणी में आती है, इसलिए इस ऐतिहासिक सफल सर्जरी को वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इस तकनीक की मदद से भविष्य में अन्य महान कपियों (Great Apes) की जान बचाना भी संभव हो सकेगा।

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