समंदर में 'हाई-वोल्टेज' ड्रामा: 98 हजार टन रूसी तेल ले जा रहे भारतीय कैप्टन ब्रिटेन में गिरफ्तार, जानें कोर्ट क्यों पहुंची बात
अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार (International Maritime Trade) और वैश्विक राजनीति के बीच से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड के नैनीताल के रहने वाले 38 वर्षीय भारतीय मर्चेंट नेवी कैप्टन अजय पंत (Captain Ajay Pant) को ब्रिटेन में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह पूरा मामला समंदर में 98,000 टन से अधिक रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) के परिवहन और पश्चिमी प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़ा है। फिलहाल यह मामला ब्रिटेन की अदालत (London Court) में पहुंच चुका है, जहां कैप्टन पंत को जमानत देने से भी इनकार कर दिया गया है।
इंग्लिश चैनल में ब्रिटिश कमांडो का 'कमांडो एक्शन'
यह घटना तब शुरू हुई जब 14 जून को कैप्टन अजय पंत के नेतृत्व में तेल टैंकर 'एमवी स्मर्टोज़' (MV Smyrtos) रूस के उस्त-लुगा टर्मिनल से करीब 1,01,400 टन (लगभग 98 हजार टन नेट) कच्चा तेल लादकर गुजरात के सिक्का पोर्ट के लिए रवाना हुआ था। जैसे ही यह विशाल जहाज इंग्लिश चैनल (English Channel) के रास्ते ब्रिटिश समुद्री सीमा में दाखिल हुआ, यूके की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) और ब्रिटिश रॉयल मरीन कमांडोज ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर जहाज को बीच समंदर में ही घेर लिया और अपने नियंत्रण में ले लिया।
रूस के 'शैडो फ्लीट' और बिना झंडे (Flagless) का होना बनी वजह
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय और अभियोजकों (Prosecutors) का दावा है कि 'एमवी स्मर्टोज़' नाम का यह जहाज रूस के उस 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) यानी रहस्यमयी जहाजी बेड़े का हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल रूस पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल बेचने के लिए करता है। इसके अलावा, यह जहाज कैमरून के झंडे (Cameroonian Flag) के तहत पंजीकृत था, लेकिन यात्रा के दौरान कैमरून ने इसे अपनी रजिस्ट्री से हटा दिया, जिसके कारण जहाज बिना किसी वैध ध्वज राष्ट्र (Flag State) के अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए ब्रिटिश जलक्षेत्र में घूम रहा था।
कोर्ट में दलील: 'कैप्टन सिर्फ एक कर्मचारी, उसने हुक्म माना'
इस मामले के ब्रिटिश कोर्ट में पहुंचने के बाद कैप्टन अजय पंत पर रूस (प्रतिबंध) विनियम 2019 के उल्लंघन के तहत अवैध रूप से रूसी तेल को तीसरे देश में पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। सुनवाई के दौरान कैप्टन पंत के वकील जेम्स डायमंड ने अदालत में पुरजोर दलील दी कि, "कैप्टन पंत का कार्गो या जहाज के रूट पर कोई व्यक्तिगत नियंत्रण नहीं था। वह केवल अपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन (एनर्जियोस मैरीटाइम) के आदेशों का पालन कर रहे थे और एक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में अपनी ड्यूटी कर रहे थे।" हालांकि, कोर्ट ने इस बात की आशंका जताते हुए कि वे रूस की मदद से देश छोड़ सकते हैं, उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
10 साल की जेल का खतरा, भारत सरकार एक्टिव
ब्रिटेन के कड़े कानूनों के मुताबिक, अगर कैप्टन पंत पर लगे ये आरोप साबित हो जाते हैं, तो उन्हें अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को कैप्टन पंत तक कांसुलर एक्सेस (राजनयिक पहुंच) मिल गई है और वे उनके अधिकारों, सुरक्षा व कानूनी सहायता के लिए ब्रिटिश प्रशासन और शिपिंग कंपनी के लगातार संपर्क में हैं।