सऊदी रक्षा मंत्रालय पर मिसाइल हमले का दावा, हूतियों ने कहा- सीधे निशाने पर लगी, तेल रिफाइरी भी तबाह

सऊदी रक्षा मंत्रालय पर मिसाइल हमले का दावा, हूतियों ने कहा- सीधे निशाने पर लगी, तेल रिफाइरी भी तबाह

 

मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं और तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमलों को और अधिक तीव्र करते हुए एक बहुत बड़ा और खतरनाक दावा किया है। हूतियों की ओर से यह कहा गया है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित रक्षा मंत्रालय और देश के सबसे बड़े तेल प्रतिष्ठानों में से एक रास तनुरा तेल रिफाइरी को अपने बैलिस्टिक मिसाइलों से सीधे तौर पर निशाना बनाया है। इस बड़े हमले के दावे के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार और खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि दुनिया के ऊर्जा सुरक्षा सप्लाई चेन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। स्थानीय चश्मदीदों और पत्रकारों के अनुसार, रियाद और पूर्वी प्रांत के अल-खोबर इलाके में तड़के सुबह तेज धमाकों की गूंज सुनाई दी, जिसके बाद सायरन बज उठे और लोगों को मोबाइल अलर्ट के जरिए सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।

हूतियों के सटीक निशाने का दावा और रास तनुरा तेल रिफाइरी की तबाही

हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता द्वारा जारी किए गए बयानों में यह दावा किया गया है कि उनके द्वारा दागी गई मिसाइलें बिना किसी चूक के सीधे अपने निर्धारित लक्ष्यों पर जाकर गिरी हैं। सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित रास तनुरा कॉम्प्लेक्स मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइरिरी में से एक है, जिसकी रोजाना तेल शोधन क्षमता करीब 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है। इस महत्वपूर्ण तेल सुविधा केंद्र पर हमले के बाद वहां बड़े पैमाने पर आग लगने और काले धुएं का गुबार उठने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, लेकिन इस हमले से हुए वित्तीय नुकसान और ऑयल-लोडिंग ऑपरेशंस पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन अभी किया जा रहा है। हूतियों ने केवल तेल रिफाइरी ही नहीं, बल्कि दक्षिणी सऊदी अरब के नज्रान एयरपोर्ट और खमीस मुशैत स्थित किंग खालिद एयर बेस पर खड़े सैन्य परिवहन विमानों को भी बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने का दावा किया है।

सऊदी गठबंधन की जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय कूटनीति में हलचल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सऊदी नीत गठबंधन सेना भी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और उसने कई मिसाइलों को हवा में ही नाकाम करने का दावा किया है। सऊदी सिविल डिफेंस के अनुसार, मिसाइलों के मलबे मक्का, मदीना, जेद्दा और ताएफ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के पास गिरे हैं, जिससे नागरिकों में भारी दहशत का माहौल है। दूसरी ओर, कूटनीतिक मोर्चे पर भी सरगर्मी तेज हो गई है। हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच एक मजबूत डिफेंस पैक्ट पर मुहर लगी है, वहीं मिस्र की संसद ने भी सऊदी अरब की सुरक्षा के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया है। इसके जवाब में हूती नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे यमन के खिलाफ खुला युद्ध करार दिया है। जुलाई के बाद से एक बार फिर भड़के इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूटों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से एक खतरनाक मोड़ मान रहे हैं, क्योंकि यदि ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ऐसे हमले लगातार जारी रहे, तो पूरी दुनिया को इसके गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।