अमेरिकी प्रतिबंधों का असर, समंदर में खड़े ईरान के 12 टैंकर, 27 नाविक बीमार, श्रीलंका ने बढ़ाया मदद का हाथ
अमेरिकी प्रतिबंधों के बढ़ते दबाव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक उथल-पुथल के बीच हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। कच्चे तेल से भरे ईरान के कम से कम 12 विशालकाय तेल टैंकर पिछले कई हफ्तों से समुद्र के बीचों-बीच खड़े होने को मजबूर हैं। कड़े वित्तीय व समुद्री प्रतिबंधों के कारण बंदरगाहों पर लंगर डालने और ईंधन आपूर्ति करने की अनुमति न मिलने से इन जहाजों पर मौजूद क्रू मेंबर्स का जीवन भारी संकट में फंस गया है। लंबी अवधि तक समंदर में फंसे रहने के कारण राशन, पीने के पानी और बुनियादी दवाओं की भारी किल्लत हो गई है, जिसके चलते कम से कम 27 भारतीय और ईरानी नाविक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। मानवीय संकट की इस भयावह स्थिति को देखते हुए पड़ोसी देश श्रीलंका ने आगे आकर मदद का हाथ बढ़ाया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से बीच समंदर में ठप पड़े ईरानी तेल टैंकर
ईरान पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा लगाए गए सख्त आर्थिक व व्यापारिक प्रतिबंधों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर बड़ा संकट पैदा कर दिया है। कच्चे तेल के निर्यात को पूरी तरह ठप करने के इरादे से अमेरिका द्वारा लागू की गई सख्त पाबंदियों की वजह से दुनिया का कोई भी देश या बंदरगाह इन ईरानी जहाजों को अपने तटीय सीमा में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दे रहा है। समुद्र में महीनों से खड़े होने के कारण जहाजों के ईंधन, जनरेटर और ताजे पानी की आपूर्ति प्रणाली बुरी तरह चरमरा गई है। बीमा कवरेज रद्द होने और वित्तीय लेनदेन पर लगे प्रतिबंधों के कारण जहाजों को न तो पोर्ट पर रुकने दिया जा रहा है और न ही क्रू को तटों पर उतरने की अनुमति मिल पा रही है, जिससे यह पूरा क्षेत्र एक बड़े जहाजी गतिरोध का केंद्र बन गया है।
पीने के पानी और दवाओं की किल्लत, 27 नाविकों की हालत बिगड़ी
समुद्र में हफ्तों तक फंसे रहने के कारण टैंकरों पर जीवन रक्षक संसाधनों का भंडार पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है। लगातार दूषित पानी पीने, डिहाइड्रेशन और भीषण गर्मी के कारण जहाजों पर तैनात 27 से अधिक नाविक बेहद गंभीर बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। बीमार नाविकों में से कई को तेज बुखार, पेट के गंभीर संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत है। जहाजों के कैप्टन द्वारा कई अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों से आपातकालीन मेडिकल सहायता (MEDEVAC) और मानवीय मदद की गुहार लगाई गई। विशेषज्ञों का चेतावनी भरा मानना है कि यदि जल्द ही इन नाविकों को तट पर लाकर इलाज मुहैया नहीं कराया गया, तो बीच समंदर में जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
श्रीलंका ने दिखाया मानवीय रुख, समुद्री सीमाओं के पास राहत अभियान की तैयारी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों की सख्ती के बावजूद श्रीलंका सरकार ने नाविकों की जान बचाने के लिए एक बड़ा और साहसिक मानवीय फैसला लिया है। श्रीलंकाई नौसेना और तटरक्षक बल (Sri Lanka Coast Guard) को अलर्ट पर रखते हुए श्रीलंका ने अपने प्रादेशिक जलक्षेत्र के पास फंसे इन जहाजों तक आवश्यक खाद्य सामग्री, पीने का स्वच्छ पानी और आपातकालीन दवाएं पहुंचाने के लिए कदम उठाए हैं। कोलंबो पोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों के अनुसार, यह सहायता विशुद्ध रूप से मानवीय आधार पर प्रदान की जा रही है ताकि किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान और संभावित तेल रिसाव (Oil Spill) जैसी बड़ी पर्यावरणीय तबाही को समय रहते रोका जा सके। श्रीलंका की इस पहल की अंतरराष्ट्रीय मानवीय संस्थाओं द्वारा सराहना की जा रही है।
वैश्विक कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण पर मंडराता बड़ा खतरा
बीच समंदर में 12 तेल टैंकरों का इस तरह असहाय खड़े रहना न केवल नाविकों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह हिंद महासागर के समुद्री पर्यावरण और ऊर्जा व्यापार सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ी बारूदी सुरंग साबित हो सकता है। यदि किसी टैंकर में तकनीकी खराबी या रखरखाव के अभाव के कारण कच्चे तेल का रिसाव होता है, तो इससे समुद्री जीवन और तटीय क्षेत्रों को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान के बीच जारी इस तनातनी का असर अब सीधे तौर पर निर्दोष प्रवासियों और नाविकों के जीवन पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और संयुक्त राष्ट्र इस मानवीय संकट को सुलझाने के लिए क्या ठोस रास्ता निकालते हैं।