300 फीट गहराई में अभेद्य परमाणु किला: ईरान ने पिकैक्स की पहाड़ियों में छुपाए न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपनी परमाणु संपदा को सुरक्षित करने के लिए एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा कदम उठाया है। किसी भी संभावित अमेरिकी या इजरायली हवाई हमले से अपने परमाणु कार्यक्रम को बचाने के लिए ईरान ने जमीन से सैकड़ों फीट नीचे एक अभेद्य सैन्य ठिकाना तैयार कर लिया है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने पिकैक्स (Zagros Mountains/Zagros range vicinity) की पथरीली पहाड़ियों को काटकर 300 फीट की गहराई में एक परमाणु किला बनाया है और अपने एडवांस न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज को वहां शिफ्ट कर दिया है।
पिकैक्स की पहाड़ियों में बना अभेद्य अंडरग्राउंड बेस
ईरान का यह नया परमाणु ठिकाना आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे सुरक्षित अड्डों में से एक माना जा रहा है। पहाड़ों को काटकर बनाई गई ये सुरंगे इतनी गहराई में हैं कि दुनिया के सबसे खतरनाक बंकर-बस्टर बम भी इन्हें भेदने में नाकाम साबित हो सकते हैं। ईरान ने सुरक्षा की इस बेहद मजबूत दीवार के भीतर अपने सबसे एडवांस सेंट्रीफ्यूज को तैनात किया है, जो यूरेनियम को तेजी से संवर्धित (Enrich) करने की क्षमता रखते हैं। इस कदम के बाद अब ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को किसी भी बाहरी हमले से तबाह करना लगभग नामुमकिन हो गया है।
हमलों के डर से लिया गया रणनीतिक फैसला
ईरान की इस नई चाल के पीछे इजरायल और अमेरिका के हमलों का सीधा डर है। पिछले कुछ समय में ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों और ठिकानों पर हुए रहस्यमयी हमलों के बाद, तेहरान ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। नातांज और फोर्डो जैसे मौजूदा परमाणु केंद्रों के बाद अब पिकैक्स की पहाड़ियों के नीचे बने इस नए सेंटर को ईरान के अंतिम सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान यहां इतनी बड़ी मात्रा में यूरेनियम संवर्धित कर सकता है, जो उसे परमाणु बम बनाने के बेहद करीब ले जाएगा।
अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसियों में हड़कंप
जमीन के नीचे चल रहे ईरान के इस सीक्रेट ऑपरेशन की भनक लगते ही अमेरिका की सीआईए (CIA) और इजरायल की मोसाद (Mossad) जैसी खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया इनपुट्स से यह साफ हो गया है कि इस बेस के अंदर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इजरायल ने पहले ही चेतावनी दी है कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा, लेकिन इस 300 फीट गहरे किले ने इजरायली वायुसेना के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।