"गाजा में अभी भी बच्चों का नरसंहार कर रहा इजरायल"; UN की रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा, पीएम नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
गाजा पट्टी (Gaza Strip) में पिछले कई महीनों से जारी खूनी संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की एक हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। यूएन के एक स्वतंत्र जांच आयोग ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में इजरायल पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायली सेना (IDF) गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ सैन्य अभियानों की आड़ में जानबूझकर बच्चों को निशाना बना रही है, जो सीधे तौर पर नरसंहार (Genocide) जैसी कृत्य की श्रेणी में आता है। संयुक्त राष्ट्र के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है।
8 महीनों के हमलों में 250 से ज्यादा बच्चों की मौत, कुल मृतकों में 30% मासूम
संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कुछ चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने रखे हैं:
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रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल द्वारा पिछले आठ महीनों से गाजा पट्टी पर लगातार किए जा रहे घातक हवाई हमलों में अब तक 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की जान जा चुकी है।
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सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इन मृतकों में 250 से अधिक मासूम बच्चे शामिल हैं।
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आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि गाजा में इजरायली हमलों का शिकार हुए कुल लोगों में से लगभग 30 प्रतिशत संख्या केवल बच्चों की है।
यह रिपोर्ट यूनाइटेड नेशन कमीशन की उस पिछली रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया था कि इजरायली अधिकारियों ने गाजा में नरसंहार को बढ़ावा दिया है। इसी के आधार पर इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा कथित युद्ध अपराधों (War Crimes) के मामले में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया जा चुका है।
"सीजफायर के बाद भी नहीं थमा बच्चों का कत्लेआम" - जांच आयोग के अध्यक्ष
यूएन की कमेटी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों को इस तरह जानबूझकर निशाना बनाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि इजरायल का इरादा फिलिस्तीनी आबादी को पूरी तरह से तबाह करने का है। जांच आयोग के अध्यक्ष श्रीनिवासन मुरलीधर ने सीएनएन (CNN) से बातचीत में एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा, "अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम (Ceasefire) के लागू होने के बाद भी जमीनी हालात में कोई सुधार नहीं आया है। इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों और युद्धविराम की लगातार अवहेलना की जा रही है, जिसके चलते फिलिस्तीनी बच्चों की हत्याएं और उन्हें गंभीर चोटें पहुंचाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।"
इजरायल ने आरोपों को किया सिरे से खारिज, बताया 'राजनीति से प्रेरित प्रोपेगेंडा'
दूसरी ओर, इजरायली सरकार और वहां के शीर्ष नेतृत्व ने संयुक्त राष्ट्र की इस लेटेस्ट रिपोर्ट की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए नरसंहार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इस रिपोर्ट को महज एकतरफा 'प्रोपेगेंडा' करार दिया। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के स्थायी राजदूत डैनी डेनन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज के रूप में छिपाया गया एक पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और झूठा पुलिंदा है, जिसका जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।"
मलबे और तंबुओं में जीने को मजबूर गाजा की आबादी, इजरायल ने गिनाई वजहें
इजरायल का रुख है कि वह नागरिकों को नहीं, बल्कि हमास (Hamas) के आतंकियों को निशाना बना रहा है। इजरायल ने आरोप लगाया कि हमास ने बार-बार सीजफायर के नियमों का उल्लंघन किया है और अपने हथियारों को सरेंडर करने से साफ इनकार कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी सुरक्षा खतरे का हवाला देते हुए इजरायल ने गाजा के भीतर निर्माण सामग्री, सीमेंट और भारी क्रेन व मशीनों के ले जाने पर सख्त प्रतिबंध लगा रखा है, ताकि हमास इनका इस्तेमाल दोबारा सुरंगे (Tunnels) बनाने में न कर सके। लेकिन इस प्रतिबंध का खामियाजा गाजा के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, और वहां के बहुसंख्यक लोग आज भी मलबे के बीच तंबुओं (Tents) में बेहद अमानवीय स्थितियों में रहने को विवश हैं।