नेपाल के PM बालेन शाह पहली बार भारत आएंगे, 22-24 नवंबर को हो सकता है दौरा

नेपाल के PM बालेन शाह पहली बार भारत आएंगे, 22-24 नवंबर को हो सकता है दौरा

दक्षिण एशियाई राजनीति और भारत-नेपाल के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने कार्यकाल का पहला आधिकारिक भारत दौरा करने जा रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक यात्रा आगामी 22 से 24 नवंबर के बीच प्रस्तावित है। नेपाल के प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद बालेन शाह की यह पहली विदेश यात्रा होगी, जिसके लिए उन्होंने भारत को चुना है। इस ऐतिहासिक दौरे को लेकर नई दिल्ली और काठमांडू दोनों ही देशों के विदेश मंत्रालयों में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस दौरे से दोनों पारंपरिक मित्र देशों के बीच सदियों पुराने रोटी-बेटी के रिश्तों को एक नई ऊर्जा और दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

पहली विदेश यात्रा के लिए भारत का चयन और नई दिल्ली में भव्य स्वागत की तैयारी

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नेपाल के किसी भी नए प्रधानमंत्री की पहली विदेश यात्रा हमेशा से ही चर्चा का विषय रही है। बालेन शाह द्वारा अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए भारत को चुनना यह स्पष्ट संकेत देता है कि काठमांडू के लिए नई दिल्ली के साथ संबंध कितने प्राथमिकता वाले और रणनीतिक हैं। 22 से 24 नवंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री बालेन शाह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति और विदेश मंत्री के साथ कई दौर की उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। नई दिल्ली में उनके भव्य और औपचारिक स्वागत के लिए हैदराबाद हाउस और विदेश मंत्रालय में कूटनीतिक रूपरेखा तैयार की जा रही है।

भारत-नेपाल द्विपक्षीय वार्ता के मुख्य एजेंडे और व्यापारिक समझौते

इस तीन दिवसीय ऐतिहासिक दौरे के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच कई अहम और संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत बातचीत होने की संभावना है। द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु भारत और नेपाल के बीच जलविद्युत (Hydropower) परियोजनाओं का विस्तार, सीमा पार डिजिटल पेमेंट सिस्टम, रेलवे और सड़क कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण तथा व्यापारिक सुगमता रहेगा। इसके अलावा, महाकाली संधि, पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना और सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे के तेजी से विकास जैसे लंबित पड़े प्रोजेक्ट्स को गति देने के लिए कई नए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है।

बालेन शाह की युवा और आक्रामक छवि तथा भारत के प्रति उनका नया नजरिया

नेपाल की राजनीति में पारंपरिक राजनीतिक घरानों के दबदबे को तोड़कर सत्ता के शिखर तक पहुंचे बालेन शाह एक फायरब्रांड, युवा और स्पष्टवादी नेता के रूप में जाने जाते हैं। काठमांडू के मेयर से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर काफी चर्चित रहा है। शुरुआत में उनकी कई नीतियों और बयानों को लेकर भारतीय कूटनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी रहती थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका व्यावहारिक और विकास केंद्रित दृष्टिकोण दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। बालेन शाह का फोकस नेपाल में बुनियादी ढांचे का विकास करने, युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने और भारत के साथ व्यापारिक घाटे को कम करने पर है, जिसमें भारत एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार की भूमिका निभा सकता है।

चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच बालेन शाह के भारत दौरे के कूटनीतिक मायने

दक्षिण एशिया के वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए नेपाल में चीन का बढ़ता हुआ आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। ऐसे समय में जब बीजिंग लगातार नेपाल को अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजनाओं में बांधने का प्रयास कर रहा है, बालेन शाह का यह भारत दौरा बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। भारत के रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह का यह दौरा नई दिल्ली और काठमांडू के बीच आपसी अविश्वास को दूर करने और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर साझा रणनीति बनाने का एक बेहतरीन अवसर साबित होगा। भारत हमेशा से ही 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति के तहत नेपाल की संप्रभुता और आर्थिक विकास का सबसे बड़ा समर्थक रहा है।

धार्मिक पर्यटन, संस्कृति और दोनों देशों के आम नागरिकों पर असर

भारत और नेपाल केवल दो पड़ोसी देश ही नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच गहरे सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक संबंध भी हैं। पशुपतिनाथ से लेकर काशी विश्वनाथ और अयोध्या से लेकर जनकपुर तक का धार्मिक गलियारा दोनों देशों के करोड़ों नागरिकों की आस्था का प्रतीक है। बालेन शाह के इस दौरे से रामायण सर्किट और बौद्ध सर्किट जैसी धार्मिक पर्यटन परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, भारत में काम करने वाले लाखों नेपाली नागरिकों और नेपाल में कारोबार करने वाले भारतीय व्यापारियों के लिए वीजा, सीमा पार परिवहन और मुद्रा विनिमय जैसी सुगम सुविधाएं मिलने का रास्ता साफ होगा। 22 से 24 नवंबर के इस दौरे पर पूरे दक्षिण एशिया की निगाहें टिकी रहेंगी।