भारत-रूस के खिलाफ पाकिस्तान ने रची साजिश, तालिबान ने मुंह काला कर लौटाया
दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) के गलियारों से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भारत और रूस के बढ़ते सामरिक और कूटनीतिक संबंधों से बौखलाए पाकिस्तान ने इन दोनों महाशक्तियों के खिलाफ एक बेहद खतरनाक और गंदी साजिश रची थी। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने अपनी पुरानी फितरत के मुताबिक अफगान धरती का इस्तेमाल करके भारत और रूस के सामरिक हितों को नुकसान पहुंचाने का एक नापाक षड्यंत्र रचा था। लेकिन इस बार पाकिस्तान का दांव उसी पर भारी पड़ गया। काबुल की सत्ता पर काबिज तालिबान शासन ने पाकिस्तान की इस कुटिल चाल को न केवल समय रहते भांप लिया, बल्कि उसके मंसूबों पर पानी फेरते हुए पाकिस्तान के नुमाइंदों को दो टूक शब्दों में दुत्कार कर वापस लौटा दिया। इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया है और यह साबित कर दिया है कि आतंकवाद और साजिशों के सहारे कूटनीति खेलने वाले देश अब दुनिया के सामने पूरी तरह बेबस हो चुके हैं।
पाकिस्तान और तालिबान के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रहा तनाव अब किसी से छिपा नहीं है। जिस तालिबान को कभी पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों की गोद में पलने वाला प्रॉक्सी माना जाता था, आज वही तालिबान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के नाम पर पाकिस्तान को आंखें दिखा रहा है। भारत और रूस के बीच आतंकवाद के खिलाफ और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर बनी मजबूत सहमति से रावलपिंडी और इस्लामाबाद के हुक्मनों की नींद उड़ी हुई थी। इसी छटपटाहट में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर ऐसे तत्वों को हवा देने की कोशिश की जो भारत और रूस के प्रोजेक्ट्स और राजनयिकों को निशाना बना सकें। लेकिन तालिबान के सुरक्षा तंत्र ने समय रहते इस पूरे नेटवर्क को धर दबोचा और पाकिस्तान की साजिश का कच्चा चिट्ठा दुनिया के सामने उजागर कर दिया।
भारत और रूस की बढ़ती दोस्ती से क्यों कांप रही है पाकिस्तानी हुकूमत की रूह?
वैश्विक मंच पर भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने और बेहद प्रगाढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों में पश्चिमी देशों के तमाम दबावों के बावजूद नई दिल्ली और मास्को के बीच ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक सहयोग में अभूतपूर्व तेजी आई है। भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात और रणनीतिक समझौतों के मामले में अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का लोहा पूरी तरह मनवाया है। इसके अलावा, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया में शांति स्थापना के लिए भारत और रूस के साझा दृष्टिकोण ने पाकिस्तान के नापाक सपनों पर हमेशा के लिए ताला लगा दिया है। पाकिस्तान हमेशा से यह चाहता था कि अफगानिस्तान में हमेशा अस्थिरता बनी रहे ताकि वह अपनी सामरिक गहराई (Strategic Depth) की आड़ में भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे सके।
जब से तालिबान ने अफगानिस्तान की कमान संभाली है और भारत ने काबुल में अपने तकनीकी मिशन को दोबारा सक्रिय किया है, तब से पाकिस्तान के पैरों तले जमीन खिसक गई है। भारत द्वारा अफगानिस्तान के आम नागरिकों को मानवीय सहायता, गेहूं, चिकित्सा उपकरण और बुनियादी विकास परियोजनाओं में सहयोग देने से अफगान जनता के बीच भारत की छवि एक सच्चे मित्र के रूप में उभरी है। रूस भी मध्य एशिया की सुरक्षा को लेकर भारत के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर रहा है। पाकिस्तान के हुक्मरान इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे कि कैसे काबुल में नई दिल्ली और मास्को का प्रभाव बढ़ रहा है, और इसी ईर्ष्या के चलते उसने यह गंदी साजिश रची थी जिसे तालिबान ने करारा तमाचा मारकर नाकाम कर दिया।
तालिबान की दो टूक: अपनी धरती का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं होने देंगे
अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान ने पाकिस्तान की इस साजिश को नाकाम करके एक बड़ा भू-राजनीतिक संदेश दिया है। तालिबान के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी जमीन पर किसी भी बाहरी देश को प्रॉक्सी युद्ध खेलने की इजाजत नहीं देंगे। पाकिस्तान हमेशा से यह समझता रहा है कि तालिबान उसकी उंगलियों पर नाचेगा, लेकिन सत्ता संभालने के बाद से तालिबान ने अपनी स्वतंत्र नीति अपनानी शुरू कर दी है। डूरंड लाइन (Durand Line) के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच पहले से ही खूनी संघर्ष और सीमा विवाद चल रहा है, और अब इस तरह की खुफिया साजिशों के बेनकाब होने से दोनों के बीच का खटास अपने चरम पर पहुंच गया है।
तालिबान के खुफिया अधिकारियों ने पाकिस्तानी एजेंटों और उनके द्वारा समर्थित स्लीपर सेल के मंसूबों को दरकिनार करते हुए उन्हें कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि वे अपने अंदरूनी संकटों को सुलझाने पर ध्यान दें, न कि अफगानिस्तान की शांति भंग करने की कोशिश करें। तालिबान ने भारत और रूस के खिलाफ रचे गए इस षड्यंत्र के पुख्ता सबूत भी अपने पास सुरक्षित रखे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश किया जा सके। काबुल के इस कड़े रुख ने इस्लामाबाद के हुक्मनों को हिलाकर रख दिया है, क्योंकि अब उनके पास पड़ोसी देशों में दखलअंदाजी करने के लिए कोई विश्वसनीय रास्ता नहीं बचा है।
वैश्विक कूटनीति में पाकिस्तान की भारी फजीहत और अलग-थलग पड़ता मुल्क
भारत और रूस के खिलाफ रची गई इस साजिश के बेनकाब होने के बाद वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में पाकिस्तान की चौतरफा फजीहत हो रही है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के प्रायोजक के रूप में पहचाने जाने वाला पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका है। आर्थिक बदहाली, आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल, भुखमरी और विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी से जूझ रहा पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक तरफ जहां देश की जनता दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसकी खुफिया एजेंसियां अभी भी साजिशें रचने में अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रही हैं।
दुनिया के बड़े देश अब इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का मुख्य स्रोत कौन है। भारत की आक्रामक और स्पष्ट विदेश नीति तथा रूस के साथ उसकी अटूट रणनीतिक साझेदारी के आगे पाकिस्तान के ये ओछे हथकंडे पूरी तरह से फेल साबित हो रहे हैं। रूस ने भी स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खात्मे के लिए वह भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। ऐसे में, पाकिस्तान की इस हरकत ने उसे वैश्विक कूटनीति में और अधिक अकेला कर दिया है, जहां अब उस पर कोई भी देश भरोसा करने को तैयार नहीं है।
निष्कर्ष: पाकिस्तान की कूटनीति का अंत और भारत की मजबूत होती स्थिति
तालिबान द्वारा पाकिस्तान के नापाक चेहरों को बेनकाब कर वापस लौटाए जाने की यह घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि धोखे और षड्यंत्र की बुनियाद पर टिके देश कभी लंबे समय तक सफल नहीं हो सकते। भारत ने हमेशा शांति, संवाद और विकास के रास्ते पर चलकर अपनी वैश्विक पहचान बनाई है, जबकि पाकिस्तान ने हमेशा दूसरों के खिलाफ साजिशें रचकर अपना राजनीतिक वजूद बचाने की कोशिश की है। तालिबान के इस दो टूक जवाब ने पाकिस्तान की उस सोच को हमेशा के लिए दफन कर दिया है जिसके तहत वह दक्षिण एशिया के देशों को अपनी कठपुतली समझता था। भारत और रूस के खिलाफ रची गई यह साजिश अंततः पाकिस्तान के लिए ही एक बड़ा राजनीतिक बूमरैंग साबित हुई है, जो आने वाले समय में उसके पतन की कहानी को और तेजी से लिखेगी।