ईरान-अमेरिका महाडील के बीच अचानक वॉशिंगटन पहुंचे पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार, मार्को रुबियो के साथ गुप्त बैठक की इनसाइड स्टोरी
पश्चिम एशिया में जारी भयंकर सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बेहद नाजुक कूटनीतिक वार्ताओं के बीच एक और बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सामने आया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार एक बेहद महत्वपूर्ण और अचानक तय हुए आधिकारिक दौरे पर संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की राजधानी वॉशिंगटन पहुंच चुके हैं। वॉशिंगटन पहुंचने पर अमेरिका में तैनात पाकिस्तानी राजदूत रिजवान सईद शेख और दूतावास के कई उच्च अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। इशाक डार का यह अमेरिकी दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक 60 दिनों के शांति समझौते (MoU) का मसौदा तैयार हो चुका है। हालांकि, इस महाडील पर जहां ईरान ने अभी तक पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि वह अभी इस मसौदे पर गहराई से विचार कर रहे हैं।
आखिरी वक्त पर बदला गया बैठक का समय, डार और मार्को रुबियो के बीच होगी बंद कमरे में बात
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच होने वाली इस महाबैठक को लेकर पर्दे के पीछे काफी कूटनीतिक हलचल चल रही है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं की यह मुलाकात पहले गुरुवार को ही तय की गई थी, लेकिन वैश्विक घटनाक्रमों और कुछ बेहद गोपनीय कारणों के चलते ऐन वक्त पर इस मीटिंग का समय बदल दिया गया। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इशाक डार और मार्को रुबियो न केवल अमेरिका-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे, बल्कि आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, विशेषकर ईरान संकट पर गहन चर्चा करेंगे। इस बातचीत का मुख्य फोकस बातचीत और कूटनीति के जरिए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को दोबारा बहाल करना है।
डॉन अखबार का बड़ा दावा: अमेरिका और ईरान के बीच 'बिचौलिया' बनने की कोशिश में पाकिस्तान
पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार 'डॉन' (Dawn) की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इशाक डार का यह दौरा वॉशिंगटन के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को फिर से जिंदा करने की पाकिस्तान की एक बड़ी कोशिश है। असल में, पिछले कई हफ्तों से पाकिस्तान इस पूरे वैश्विक संकट में खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक सक्रिय मध्यस्थ (Mediator) या बिचौलिये के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति ईरान से सटी हुई है, इसलिए वह इस युद्ध से सबसे ज्यादा डरा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के दिनों में पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक अधिकारी लगातार अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी सुरक्षा नेतृत्व के साथ बैक-चैनल डिप्लोमेसी (गुप्त कूटनीति) के जरिए नियमित संपर्क में बने हुए हैं।
व्हाइट हाउस में ट्रंप की कैबिनेट मीटिंग के बाद बढ़ा सस्पेंस, अमेरिका का रुख अब भी सख्त
भले ही पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थता की बड़ी कसम खा रहा हो, लेकिन अमेरिका और ईरान दोनों के तेवर अभी भी बेहद तीखे और आक्रामक बने हुए हैं। गुरुवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई हाई-लेवल कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद दोनों देशों की तरफ से एक-दूसरे के खिलाफ नए सैन्य हमलों की चेतावनी दी गई है। कैबिनेट बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि बाइडेन-ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि अगले कुछ घंटों या दिनों में कूटनीतिक मोर्चे पर कोई ठोस प्रगति देखने को मिल सकती है। हालांकि, इसके साथ ही रुबियो ने बेहद कड़े लहजे में ईरान को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया कि अगर कूटनीति का यह रास्ता पूरी तरह विफल रहता है, तो अमेरिका के पास ईरान को सबक सिखाने के लिए अन्य सभी सैन्य विकल्प भी टेबल पर पूरी तरह मौजूद हैं