भारत के 'अस्त्र' को चुनौती देगा पाकिस्तान का ‘फुस्स बम’, क्या है 'फाज' मिसाइल की इकलौती पावर?
दक्षिण एशिया के रणनीतिक और सैन्य संतुलन में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित देश की सबसे घातक और मारक विजुअल रेंज से परे (BVRAAM) हवा से हवा में वार करने वाली 'अस्त्र' मिसाइल की गूंज से पड़ोसी देश पाकिस्तान में खलबली मची हुई है। भारतीय वायुसेना की बढ़ती हवाई ताकत और अस्त्र मिसाइल के बेजोड़ प्रदर्शन का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान ने भी अपनी नई हवा से हवा में मार करने वाली 'फाज' (Faaz) मिसाइल प्रणाली को पेश करने का दावा किया है। हालांकि, दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह दावा जमीनी हकीकत से कोसों दूर है और यह भारत की तकनीकी श्रेष्ठता के आगे एक बार फिर महज एक खोखला प्रचार साबित हो सकता है।
भारत की अस्त्र मिसाइल की अचूक मारक क्षमता और स्वदेशी तकनीक का लोहा
भारत की स्वदेशी 'अस्त्र' मिसाइल प्रणाली भारतीय वायुसेना का वह ब्रह्मास्त्र है, जिससे दुश्मन के लड़ाकू विमान थर-थर कांपते हैं। यह मिसाइल मेक इन इंडिया पहल के तहत पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित की गई है। अस्त्र मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी 100 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता और मैक 4.5 से भी ज्यादा की सुपरसोनिक रफ्तार है। यह मिसाइल दिन हो या रात, हर मौसम में दुश्मन के जेट को पलक झपकते ही तबाह करने में पूरी तरह सक्षम है। सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे अग्रिम पंक्ति के भारतीय लड़ाकू विमानों में एकीकृत यह मिसाइल आधुनिक रडार तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर (ECCM) और ऑटोमैटिक सीकर से लैस है, जो दुश्मन के किसी भी जैमिंग प्रयास को पूरी तरह नाकाम कर देती है।
पाकिस्तान की 'फाज' मिसाइल की इकलौती पावर और उसकी जमीनी हकीकत का सच
दूसरी ओर, पाकिस्तान की तरफ से जिस 'फाज' (Faaz) मिसाइल का जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है, उसकी क्षमताओं पर शुरू से ही गहरे सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मिसाइल की इकलौती सबसे बड़ी पावर इसका हल्का वजन और चीन के सहयोग से तैयार की गई गाइडेड रडार तकनीक को माना जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इसे जेएफ-17 थंडर (JF-17 Thunder) जैसे हल्के लड़ाकू विमानों पर आसानी से तैनात किया जा सकता है। लेकिन अगर इसकी मारक क्षमता, रफ्तार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की गहराई से समीक्षा की जाए, तो यह भारत की अस्त्र मिसाइल के सामने काफी कमजोर नजर आती है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि चीन के पुराने कलपुर्जों और री-ब्रांडेड टेक्नोलॉजी पर निर्भर यह मिसाइल वास्तविक युद्ध की परिस्थितियों में एक फुस्स बम से ज्यादा कुछ साबित नहीं होगी।
क्या चीनी तकनीक पर टिकी 'फाज' मिसाइल दे पाएगी अस्त्र की आधुनिक टेक्नोलॉजी को मात
पाकिस्तान की अधिकांश सैन्य इकाइयां और मिसाइल प्रणालियां पूरी तरह से चीनी आयात पर निर्भर हैं। 'फाज' मिसाइल परियोजना के पीछे भी चीनी एरोस्पेस कंपनियों की तकनीक और डिजाइन का बड़ा हाथ माना जाता है। इसके विपरीत, भारत का अस्त्र प्रोजेक्ट पूरी तरह से स्वदेशी रिसर्च, एडवांस्ड सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक और उच्च स्तरीय डेटा-लिंक पर आधारित है। चीनी रडार सीकर्स और मिसाइल प्रणालियों को अतीत में कई बार वैश्विक मंचों पर तकनीकी खराबी और गलत लक्ष्यों का शिकार होते देखा गया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या चीन के भरोसे तैयार की गई 'फाज' मिसाइल आधुनिक हवाई युद्ध के मैदान में भारत के अचूक निशाने और उन्नत डेटा लिंक तकनीक के आगे टिक पाएगी।
दक्षिण एशियाई हवाई क्षेत्र में भारत का निर्विवाद दबदबा और वायुसेना की तैयारी
भारतीय वायुसेना ने हाल के वर्षों में अपनी लड़ाकू क्षमता को अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। राफेल जेट्स की तैनाती, अस्त्र मिसाइल के विभिन्न वैरियंट्स (अस्त्र मार्क-1 और मार्क-2) के सफल परीक्षण, और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के एकीकरण ने भारत के हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से अभेद्य बना दिया है। पाकिस्तान का फाज मिसाइल को आगे लाने का मकसद सिर्फ अपनी आवाम को दिलासा देना और क्षेत्र में अपनी गिरती सैन्य साख को बचाना है। भारतीय सीमा के करीब किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए भारतीय लड़ाकू पायलट अस्त्र मिसाइल की मदद से दुश्मन को बिना उसकी नजरों में आए, सीमा पार किए बिना ही हवा में नष्ट करने की पूरी क्षमता रखते हैं।
अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का आकलन और भारत-पाक मिसाइल होड़ का भविष्य
दुनियाभर के प्रमुख रक्षा संस्थानों और सैन्य शोधकर्ताओं ने भारत और पाकिस्तान की इन दोनों मिसाइल प्रणालियों की तुलनात्मक रिपोर्ट में भारत को स्पष्ट रूप से आगे रखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नाम बदलने या चीनी मिसाइलों को नया नाम देकर पेश करने से सैन्य संतुलन नहीं बदलता। भारत का ध्यान अपनी अस्त्र मिसाइल की रेंज को 160 किलोमीटर से अधिक बढ़ाने पर केंद्रित है, जिससे यह दुनिया की चुनिंदा सबसे घातक BVRAAM मिसाइलों की श्रेणी में शामिल हो चुकी है। इस तुलना से यह साफ हो जाता है कि पाकिस्तान का 'फाज' दांव एक राजनीतिक प्रचार से ज्यादा कुछ नहीं है, जबकि भारत का 'अस्त्र' आसमान में देश की संप्रभुता और सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल बना हुआ है।