संसद में नेताओं ने चलाए लात-घूंसे...खून तक निकाल लिया, फिर स्पीकर ने दी ऐसी सजा, छुपाना पड़ा मुंह
लोकतंत्र के सबसे बड़े पवित्र मंदिर संसद भवन की गरिमा को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। बहस और नीतिगत चर्चाओं के लिए बने प्रतिष्ठित सदन के भीतर उस वक्त अप्रत्याशित खौफनाक मंजर देखने को मिला जब जनप्रतिनिधियों ने सारे कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर एक-दूसरे पर लात-घूंसे और थप्पड़ बरसाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते यह तीखी बहस एक खूनी गुत्थमगुत्था और हाथापाई में बदल गई, जिसमें कई सांसद लहूलुहान हो गए और फर्श पर खून के धब्बे तक बिखर गए। इस अप्रत्याशित और हिंसक दृश्य को देखकर पूरा सदन सन्न रह गया। मामले की भयावहता और अभूतपूर्व हिंसा को देखते हुए स्पीकर (संसदीय अध्यक्ष) ने कड़ा रुख अपनाते हुए इतिहास का सबसे सख्त कदम उठाया और उपद्रवी सांसदों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का फरमान सुना दिया।
मामूली बहस से शुरू हुआ विवाद और देखते ही देखते लात-घूंसों में तब्दील हुई जंग
सदन की कार्यवाही की शुरुआत रोज की तरह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विधेयक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के साथ हुई थी। हालांकि, सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच जुबानी तीर चलने लगे और तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। बहस जैसे-जैसे गरम हुई, दोनों पक्षों के माननीय सदस्य अपनी मर्यादा खो बैठे और वेल में आकर आमने-सामने खड़े हो गए। शुरुआती कहासुनी और धक्का-मुक्की के बाद माहौल इतना बिगड़ गया कि सांसदों ने एक-दूसरे का कॉलर पकड़ लिया और जमकर लात-घूंसे चलाने लगे। जो जनप्रतिनिधि सदन में जनता की आवाज उठाने आए थे, वे एक-दूसरे की जान के दुश्मन बने नजर आए। मार्शल और सुरक्षाकर्मियों के बीच-बचाव करने से पहले ही कई सांसदों को गंभीर चोटें आईं और कुछ के चेहरे तथा सिर से खून निकलने लगा, जिससे पूरा परिसर तनाव और सनसनी से भर उठा।
लहूलुहान हुए सांसद और संसद भवन में अफरा-तफरी का खौफनाक मंजर
हिंसा के इस खौफनाक तांडव के दौरान कई माननीय सदस्य जमीन पर गिर पड़े और चीख-पुकार मच गई। संसद की कार्यवाही को कवर कर रहे मीडिया गैलरी में बैठे लोग और अन्य वरिष्ठ राजनेता इस अराजकता को देखकर स्तब्ध रह गए। सुरक्षा अधिकारी किसी तरह बीच-बचाव कर घायल और खून से लथपथ सांसदों को उठाकर आपातकालीन चिकित्सा कक्ष ले गए, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। सदन के फर्श पर जगह-जगह बिखरे दस्तावेज, टूटे हुए माइक और खून के निशान इस बात की गवाही दे रहे थे कि कैसे मर्यादा की सारी सीमाएं लांघी जा चुकी थीं। इस ऐतिहासिक बदनामी के बाद संसद की गरिमा को पहुंचे नुकसान की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों तक पहुंच गई है।
स्पीकर का अभूतपूर्व और कठोर फैसला: उपद्रवी सांसदों पर गिरी निलंबन की गाज
सदन की गरिमा को तार-तार होते देख स्पीकर (अध्यक्ष) का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने तुरंत आदेश जारी कर कार्यवाही को स्थगित किया और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी घटना की सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) खंगालने का निर्देश दिया। जांच के तुरंत बाद स्पीकर ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और निष्पक्षता व कड़ाई का परिचय देते हुए हिंसा में शामिल सभी मुख्य आरोपियों और हिंसक सांसदों को सदन से निलंबित करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही दोषी नेताओं की संसदीय विशेषाधिकार समिति से जांच कराने के आदेश दिए गए हैं, जिससे उनकी सदस्यता खत्म होने तक का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। स्पीकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में गुंडागर्दी और हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गहराता संकट और विशेषज्ञों की कड़ी चिंता
इस अभूतपूर्व खूनी झड़प के सामने आने के बाद दुनिया भर के संविधान विशेषज्ञों, पूर्व नौकरशाहों और आम जनता ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब कानून बनाने वाले ही कानून और मर्यादा की धज्जियां उड़ाएंगे, तो आम जनता में क्या संदेश जाएगा। संसद में वैचारिक मतभेदों को सुलझाने के लिए संवाद और तर्क का सहारा लिया जाना चाहिए, न कि शारीरिक हिंसा और गुंडागर्दी का। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि राजनीति में बढ़ती कटुता किस हद तक गिर चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश की साख को लगा झटका और आगे की कड़ी राह
संसद के भीतर हुई इस ऐतिहासिक और शर्मनाक झड़प का असर न केवल घरेलू राजनीति पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देश की छवि पर पड़ रहा है। कई देशों के विश्लेषकों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। फिलहाल स्पीकर द्वारा दी गई इस कडी सजा और निलंबन के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि नियमों से बढ़कर कोई नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या इस कड़े अनुशासन के बाद सदन की मर्यादा वापस बहाल हो पाती है या फिर राजनीतिक गलियारों में यह विवाद और नया रूप धारण करता है।