कंगाल पाकिस्तान को अब चाहिए दलाली का इनाम! अमेरिका के आगे कटोरा फैलाकर मांगी 96,388 करोड़ की भीख

कंगाल पाकिस्तान को अब चाहिए दलाली का इनाम! अमेरिका के आगे कटोरा फैलाकर मांगी 96,388 करोड़ की भीख

चौतरफा कर्ज के दलदल में धंसे और कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान ने एक बार फिर दुनिया के सामने हाथ फैला दिए हैं। इस बार पाकिस्तान ने अपने पुराने आका अमेरिका के सामने झोली फैलाते हुए करीब 96,388 करोड़ रुपये ($11.6 Billion से अधिक) की भारी-भरकम वित्तीय मदद की मांग की है। दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस आर्थिक मदद को पाकिस्तान की उन पुरानी सेवाओं के 'इनाम' के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे आलोचक अक्सर रणनीतिक दलाली का नाम देते रहे हैं।

वाशिंगटन के सामने फैलाया झोली, दी पुरानी वफादारी की दुहाई

इस्लामाबाद के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी राजनयिकों और आर्थिक सलाहकारों की एक टीम ने अमेरिकी प्रशासन के साथ पर्दे के पीछे बड़ी बैठकें की हैं। इस बातचीत में पाकिस्तान ने तर्क दिया है कि उसने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जंग (War on Terror) और अफगानिस्तान मोर्चे पर अमेरिका का जो साथ दिया था, उसकी भारी कीमत उसकी अर्थव्यवस्था को चुकानी पड़ी है। अब पाकिस्तान उसी पुरानी वफादारी और रणनीतिक सहयोग के बदले वाशिंगटन से इस बड़े बेलआउट पैकेज की उम्मीद कर रहा है।

कंगाली से बदहाल आवाम और डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने की छटपटाहट

पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) वेंटिलेटर पर है, महंगाई आसमान छू रही है और देश पर अंतरराष्ट्रीय कर्ज का बोझ इतना बढ़ चुका है कि उसे चुकाने के लिए भी नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं। आईएमएफ (IMF) की सख्त शर्तों और चीनी कर्ज के जाल में फंसे इस्लामाबाद को अब लगता है कि केवल अमेरिका ही उसे इस दलदल से निकाल सकता है। यही वजह है कि वह बिना किसी संकोच के अमेरिकी चौखट पर कटोरा लेकर खड़ा हो गया है।

क्या बाइडन-ट्रंप प्रशासन देगा पाकिस्तान को यह भारी-भरकम इमदाद?

अमेरिकी रक्षा और विदेश नीति के गलियारों में पाकिस्तान को लेकर अब पहले जैसी हमदर्दी नहीं बची है। वाशिंगटन के रणनीतिकार अच्छी तरह जानते हैं कि पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका से डॉलर वसूलता है और दूसरी तरफ चीन की गोद में जाकर बैठ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस बार पाकिस्तान की झोली में इतनी बड़ी रकम आसानी से नहीं डालने वाला है। अमेरिका इस मदद के बदले पाकिस्तान से कड़े सैन्य और रणनीतिक समझौते (Strategic Deals) चाह सकता है, जिसे मानना पाकिस्तान के लिए 'कुआं और खाई' जैसी स्थिति पैदा कर देगा।

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