सऊदी अरब पर 10 मिसाइलों से हमला, भारत ने दी चेतावनी, हूतियों ने मक्का-मदीना अटैक के आरोपों पर दी सफाई
पश्चिम एशिया का सुलगता रणक्षेत्र एक बार फिर भीषण तबाही और कूटनीतिक तनाव के केंद्र में आ चुका है। सऊदी अरब की धरती पर एक साथ दस घातक मिसाइलों के दागे जाने से हड़कंप मच गया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में खौफ का माहौल पैदा हो गया है। इस खतरनाक हमले के बाद दुनिया भर के देशों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पश्चिम एशिया की आग किस दिशा में आगे बढ़ेगी। इस बीच भारत सरकार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताते हुए सभी पक्षों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। वहीं, इस हमले के बाद सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब मक्का और मदीना जैसे पवित्र इस्लामी स्थलों को निशाना बनाए जाने के आरोप लगने लगे, जिसके जवाब में यमन के हूती विद्रोहियों ने सामने आकर अपनी सफाई पेश की है और इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है।
सऊदी अरब की सुरक्षा पर अब तक का सबसे बड़ा मिसाइल प्रहार
यमन की सीमा से संचालित होने वाले हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के विभिन्न सामरिक ठिकानों पर एक साथ दस बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की इस घटना ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सऊदी वायु रक्षा बलों (Air Defense Forces) ने अपनी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए हवा में ही कई मिसाइलों को नेस्तनाबूद करने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद कई इलाकों में धमाकों की गूंज से दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आसमान में आग के गोले और तेज धमाकों की आवाजें इतनी भयानक थीं कि स्थानीय लोगों में अफरातफरी मच गई। इन हमलों के बाद से रियाद और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है और संवेदनशील प्रतिष्ठानों के इर्द-गिर्द घेराबंदी और कड़ी कर दी गई है।
भारत सरकार की कड़ी चेतावनी और प्रवासियों की सुरक्षा पर बड़ा संकट
इस खौफनाक हमले के बाद नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। सऊदी अरब में रह रहे करीब 26 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पूरी तरह मुस्तैद हो गई है और वहां के दूतावास के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दो टूक शब्दों में कहा है कि इस तरह के अंधाधुंध सैन्य हमलों से न केवल क्षेत्रीय शांति भंग होती है, बल्कि वहां काम कर रहे लाखों प्रवासी मजदूरों की जान पर भी हर पल तलवार लटकी रहती है। भारतीय दूतावास ने सऊदी में रह रहे सभी प्रवासियों के लिए नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और खिड़कियों व बालकनी से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
मक्का-मदीना पर हमले के आरोपों पर हूतियों की सफाई और बचाव की मुद्रा
इस भीषण मिसाइल हमले के बाद सोशल मीडिया और वैश्विक राजनीतिक गलियारों में यह खबर आग की तरह फैल गई कि हूती विद्रोहियों ने दुनिया के सबसे पवित्र इस्लामी स्थलों यानी मक्का और मदीना को निशाना बनाने की कोशिश की है। इस गंभीर आरोप के बाद मुस्लिम देशों में भारी आक्रोश देखने को मिला, जिसके दबाव में आकर हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता और शीर्ष नेतृत्व को तुरंत सफाई देनी पड़ी। हूती संगठन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में यह दावा किया गया कि उनका निशाना केवल सऊदी अरब के सैन्य अड्डे, हवाई अड्डे और आर्थिक ठिकाने थे, न कि कोई भी धार्मिक या पवित्र स्थल। उन्होंने इन आरोपों को अपने खिलाफ एक राजनीतिक प्रोपेगैंडा करार दिया, ताकि क्षेत्रीय देशों की सहानुभूति सऊदी सरकार के पक्ष में मोड़ी जा सके।
भू-राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडराते काले बादल
सऊदी अरब और हूतियों के बीच छिड़ी इस आर-पार की लड़ाई का असर अब सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने लगा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शुमार सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे पर जब भी कोई खतरा मंडराता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से उछलने लगते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस प्रकार के मिसाइल हमले जारी रहे, तो यह संघर्ष केवल यमन या सऊदी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को एक महाविनाश की तरफ धकेल देगा। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों के तमाम कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जमीन पर शांति बहाली की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में यह संकट और अधिक गंभीर रूप धारण कर सकता है।