पीट हेगसेथ से अनबन के बाद ट्रंप प्रशासन के बड़े अफसर ने छोड़ी नौकरी, मचा सियासी भूचाल
राजनीति की दुनिया में पर्दे के पीछे क्या कुछ पक रहा होता है, इसकी भनक अक्सर तब लगती है जब कोई बड़ा धमाका होता है। अमेरिका की राजनीति और डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में इन दिनों कुछ ऐसा ही हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जब भी किसी शक्तिशाली सरकार का गठन होता है, तो नीतिगत फैसलों और वैचारिक मतभेदों के चलते शीर्ष अधिकारियों के बीच आपसी खींचतान आम बात बन जाती है। ताजा मामला डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और प्रशासन के एक बेहद अहम ओहदे पर बैठे वरिष्ठ अधिकारी से जुड़ा है, जिन्होंने अपने ही विभाग के प्रमुख यानी रक्षा विभाग के नामचीन चेहरे पीट हेगसेथ के साथ वैचारिक मतभेदों के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बॉस के साथ लगातार बढ़ रही तकरार और काम करने के तौर-तरीकों पर असहमति के चलते इस बड़े अफसर ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी नौकरी को लात मार दी। इस अचानक आए इस्तीफे से वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है।
पीट हेगसेथ के साथ तीखी अनबन और प्रशासनिक मतभेद
इस पूरी राजनीतिक हलचल के केंद्र में अमेरिका के रक्षा मंत्री या प्रमुख रक्षा मामलों को संभालने वाले पीट हेगसेथ का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। पीट हेगसेथ अपनी आक्रामक कार्यशैली और कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं, जो कई बार उनके अधीन काम करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के गले नहीं उतरते। बताया जा रहा है कि डिफेंस और रणनीतिक मामलों को लेकर इस्तीफा देने वाले इस बड़े अफसर और पीट हेगसेथ के बीच लंबे समय से अंदरखाने जबरदस्त तनातनी चल रही थी। नीतियों के क्रियान्वयन, सैन्य सुधारों और आंतरिक नियुक्तियों के मुद्दों पर दोनों के विचार जमीन आसमान की तरह अलग थे। जब किसी विभाग के शीर्ष नेतृत्व के बीच ही तालमेल पूरी तरह टूट जाता है, तो या तो किसी एक को झुकना पड़ता है या फिर रास्ते अलग करने पड़ते हैं। इस मामले में अफसर ने झुकने के बजाय अपने आत्मसम्मान और सिद्धांतों को प्राथमिकता दी और अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। यह टकराव इस बात का प्रमाण है कि ट्रंप प्रशासन के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया कितनी दबाव भरी और जटिल हो चुकी है।
नौकरी को मारी लात और सियासी गलियारों में मचा हड़कंप
जब कोई शीर्ष अधिकारी किसी बड़े विवाद या मतभेद के बाद अचानक इस्तीफा देता है, तो वह महज एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक बयान बन जाता है। इस बड़े अफसर द्वारा नौकरी को लात मारने का यह कदम अमेरिकी मीडिया में हेडलाइंस बन चुका है। विपक्षी दल इसे ट्रंप प्रशासन की अंदरूनी कलह और कुप्रबंधन का एक बड़ा सबूत बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना इस बात को दर्शाती है कि व्हाइट हाउस के भीतर काम करने का दबाव किस हद तक बढ़ चुका है। पीट हेगसेथ के साथ हुई इस तकरार ने यह साबित कर दिया है कि ट्रंप की टीम में टिके रहने के लिए केवल वफादारी काफी नहीं है, बल्कि उनके सख्त नेतृत्व के साथ कदमताल करना भी उतना ही जरूरी है जो हर किसी के लिए मुमकिन नहीं हो पा रहा है। इस इस्तीफे के बाद से प्रशासनिक महकमे में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारी भी इसी रास्ते पर चल सकते हैं या फिर इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए कोई नया फॉर्मूला निकाला जाएगा।
ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियां
डонаल्ड ट्रंप की यह खासियत रही है कि वे अपनी टीम को बहुत ही सख्त और परिणाम-उन्मुख (Result-oriented) तरीके से चलाते हैं। वे ऐसे लोगों को प्राथमिकता देते हैं जो बिना किसी नखरे के उनके विजन को जमीन पर उतार सकें। लेकिन इस प्रक्रिया में कई बार अनुभवी और पेशेवर अधिकारियों के साथ उनका टकराव होना स्वाभाविक हो जाता है। पीट हेगसेथ और इस वरिष्ठ अधिकारी के बीच का यह विवाद उसी कड़े प्रशासनिक कल्चर का एक साइड-इफेक्ट माना जा रहा है। हालांकि, प्रशासन के समर्थकों का कहना है कि बड़े बदलाव लाने के लिए इस तरह के कड़े फैसले लेने पड़ते हैं और जो लोग गति के साथ नहीं चल सकते, उनका अलग होना ही बेहतर होता है। इसके बावजूद, इस तरह के सार्वजनिक इस्तीफे सरकार की छवि पर थोड़ा असर जरूर डालते हैं। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े इस अहम विभाग में इस खाली हुई जगह को कौन भरता है और क्या नया अधिकारी इस अंदरूनी कलह को थामने में कामयाब हो पाएगा या नहीं।
अंदरूनी कलह का असर और वैश्विक कूटनीति पर पड़ने वाले प्रभाव
किसी भी देश का रक्षा विभाग उसकी रीढ़ की हड्डी होता है, और यदि उसी विभाग के शीर्ष नेतृत्व के बीच आपसी खींचतान और इस्तीफे का दौर शुरू हो जाए, तो इसका असर सीधे तौर पर देश की सुरक्षा नीतियों पर पड़ सकता है। अमेरिका जैसे महाशक्तिशाली देश में इस तरह की आंतरिक उथल-पुथल पूरी दुनिया के रणनीतिकारों की नजरों में होती है। दुश्मन देश भी ऐसी स्थितियों पर बारीक नजर रखते हैं ताकि इसका कूटनीतिक लाभ उठाया जा सके। पीट हेगसेथ और इस बड़े अफसर की तकरार ने एक बार फिर से यह बहस छेड़ दी है कि क्या प्रशासनिक सुधारों के नाम पर अनुभवी लोगों की बलि दी जा रही है या फिर यह एक मजबूत और अनुशासित व्यवस्था बनाने की अनिवार्य कीमत है। कारण जो भी रहा हो, लेकिन इस इस्तीफे ने यह तो साफ कर दिया है कि वाशिंगटन की राजनीति में पावर गेम और ईगो की लड़ाई किसी भी हद तक जा सकती है, जहां सबसे बड़े ओहदेदार भी पल भर में अपनी कुर्सी को अलविदा कह सकते हैं।