सजा पूरी, फिर भी जेल में कैद! बांग्लादेश में फंसे 168 भारतीय; दूतावासों की सुस्ती से खुली पोल

सजा पूरी, फिर भी जेल में कैद! बांग्लादेश में फंसे 168 भारतीय; दूतावासों की सुस्ती से खुली पोल

बांग्लादेश की विभिन्न जेलों में 15 देशों के 407 नागरिक बंद हैं, जिनमें से 172 कैदी ऐसे हैं जो अपनी निर्धारित सजा पूरी कर चुके हैं या कानूनी तौर पर रिहाई के पात्र हैं, लेकिन संबंधित देशों से कूटनीतिक मंजूरी और स्वदेश वापसी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी न होने के कारण वे आज भी रिहाई के इंतजार में सलाखों के पीछे दिन काट रहे हैं। बांग्लादेश के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक 'द डेली स्टार' द्वारा जेल विभाग के आंकड़ों के हवाले से जारी रिपोर्ट के अनुसार, इन विदेशी बंदियों में सबसे बड़ी तादाद भारत और म्यांमार के नागरिकों की है।

कुल 407 विदेशी कैदियों में से 44 को अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि 191 विचाराधीन कैदी हैं; राहत की बात यह है कि इनमें से किसी भी दोषी को फांसी की सजा नहीं सुनाई गई है। आंकड़ों के लिहाज से सूची में सबसे ऊपर भारत है, जिसके कुल 238 नागरिक बांग्लादेश की जेलों में बंद हैं और इनमें से 168 लोग अपनी पूरी सजा भुगतने के बावजूद अपने मुल्क लौटने की प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने की बाट जोह रहे हैं।

इन अपराधों के लिए बंद हैं विदेशी नागरिक

इस फेहरिस्त में पड़ोसी देश म्यांमार दूसरे स्थान पर आता है, जिसके कुल 133 नागरिक बंद हैं और इनमें 33 को सजा सुनाई जा चुकी है, हालांकि म्यांमार का केवल एक कैदी ही वतन वापसी की आधिकारिक प्रतीक्षा सूची में है। इनके अलावा अन्य देशों के कैदियों में नाइजीरिया के छह, पाकिस्तान और मलेशिया के तीन-तीन, तंजानिया और पेरू के दो-दो नागरिकों के साथ-साथ जॉर्जिया, बहामास, बेलारूस, गुयाना, कांगो, इथियोपिया और थाईलैंड का एक-एक नागरिक शामिल है। जेल महानिदेशालय के अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी विदेशियों को मादक पदार्थों की तस्करी, सोने की तस्करी, वित्तीय धोखाधड़ी, अमेरिकी डॉलर के अवैध लेनदेन, फर्जी पासपोर्ट रैकेट, अवैध वीओआईपी (VoIP) संचालन और मानव तस्करी जैसे गंभीर सीमा पार अपराधों में गिरफ्तार किया गया था।

जेल विभाग के जेलर (मीडिया एवं लॉजिस्टिक्स) मसूद हसन ज्वेल ने स्पष्ट किया कि संबंधित देशों के दूतावासों से समय पर अनापत्ति प्रमाण पत्र और सत्यापन नहीं मिलने से यह समस्या विकराल हो रही है; जेल प्रशासन लगातार बांग्लादेशी गृह व विदेश मंत्रालय के जरिए ढाका स्थित विदेशी दूतावासों से पत्राचार कर रहा है, मगर अपेक्षित प्रतिक्रिया बेहद धीमी है।

भारतीय कैदियों की स्वदेश वापसी के मामले में उनकी सटीक पहचान और नागरिकता सत्यापन सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के कांसुलर विंग के एक अधिकारी के अनुसार, 25 ऐसे भारतीय नागरिकों की आधिकारिक पहचान की जा चुकी है जिनकी सजा पूरी हो चुकी है और उनका भारत लौटना तय है। भारतीय मिशन ने बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय से इन कैदियों की वापसी प्रक्रिया में तेजी लाने और उनकी संभावित रवानगी की तिथियों की अग्रिम जानकारी साझा करने का औपचारिक अनुरोध किया है ताकि सीमा पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर जरूरी व्यवस्थाएं की जा सकें। इसके अलावा बांग्लादेश ने 121 अन्य कैदियों की सूची भी भारत को सौंपी है जिनके भारतीय नागरिक होने का दावा किया गया है, लेकिन उनके पास मौजूद कागजात नागरिकता की पुष्टि के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं। भारतीय उच्चायोग ने ऐसे सभी कैदियों तक राजनयिक पहुंच (Consular Access) मांगी है ताकि अतिरिक्त सत्यापन किया जा सके। दूसरी तरफ म्यांमार दूतावास को भेजे गए कई ईमेल्स का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

जेल अधिकारियों का कहना है कि सजा काटने के बाद भी विदेशी बंदियों को लंबे वक्त तक जेलों में रखने से प्रशासनिक परेशानियां और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण विदेशी कैदियों को स्थानीय कैदियों से अलग विशेष वार्डों में रखा जाता है और उनकी 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। यह मुद्दा हाल ही में तब और चर्चा में आया जब 4 सितंबर को कॉक्स बाजार के एक होटल से ऑनलाइन धोखाधड़ी के आरोप में छह चीनी नागरिक दबोचे गए, जबकि इससे पहले जनवरी में भी ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की साइबर यूनिट ने इसी तरह के सिंडिकेट से जुड़े पांच चीनी नागरिकों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।