भारत के कुछ नेता ध्यान भटकाने के लिए रच रहे तमाशा
भारत और चीन के बीच कूटनीतिक, सामरिक और राजनीतिक मोर्चे पर तनातनी का दौर लंबे समय से जारी है। लद्दाख सीमा विवाद और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच जारी गतिरोध के बीच ड्रैगन यानी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत के आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रम और लद्दाख के हालातों को लेकर एक बार फिर चीन के सरकारी मुखपत्र और मुखर रूप से भारत विरोधी प्रोपेगंडा फैलाने वाले अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' (Global Times) ने एक तीखा और भड़काऊ तंज कसा है। चीनी मीडिया ने अपने एक विशेष संपादकीय और रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत के कुछ राजनीतिक नेता अपने देश के घरेलू मुद्दों, आर्थिक चुनौतियों और विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर लद्दाख और सीमा विवाद के नाम पर तमाशा कर रहे हैं। इस बयान के सामने आने के बाद से नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों और कूटनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन की एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक युद्ध की रणनीति का हिस्सा है।
चीनी प्रोपेगंडा मशीनरी 'ग्लोबल टाइम्स' का भारत पर पुराना पैंतरा
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण वाले अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' की यह पुरानी फितरत रही है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और खासकर भारत के संदर्भ में हमेशा से भ्रामक और आक्रामक टिप्पणियां करता रहता है। जब भी भारत में कोई बड़ा राजनीतिक बयान सामने आता है या विपक्ष व सत्ता पक्ष के बीच सीमा सुरक्षा को लेकर तीखी बहस होती है, तो चीनी मीडिया इसे लपककर भारत की आंतरिक राजनीति में दखल देने की कोशिश करता है। इस बार भी जब भारतीय नेताओं द्वारा लद्दाख के सामरिक महत्व और चीन की गतिविधियों को लेकर सरकार से सवाल किए गए, तो चीनी मुखपत्र ने इसका गलत फायदा उठाते हुए यह प्रोपेगंडा फैलाना शुरू कर दिया कि भारत के नेता केवल घरेलू राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए इस प्रकार के बयान दे रहे हैं। चीनी विश्लेषकों का यह दावा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली और यहां के राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर बीजिंग की खुफिया और मीडिया एजेंसियां कितनी बारीकी से नजर रखती हैं।
क्या लद्दाख के मुद्दों पर भारत के भीतर चल रही सियासी बयानबाजी का फायदा उठा रहा है चीन?
भारतीय संसद और सार्वजनिक मंचों पर लद्दाख के सामरिक क्षेत्रों, वहां की जमीनी वास्तविकताओं और चीन द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर अक्सर सरकार से सवाल पूछे जाते हैं। विपक्षी दल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं तो सत्ता पक्ष अपनी मजबूत रक्षा तैयारियों का हवाला देता है। लोकतंत्र की इस स्वाभाविक और जीवंत प्रक्रिया को ही 'ग्लोबल टाइम्स' ने 'तमाशा' करार दिया है। चीन की यह कोशिश हमेशा से यही रही है कि वह किसी तरह भारत के भीतर राजनीतिक फूट डाले और यह साबित करने की कोशिश करे कि भारत अपनी आंतरिक समस्याओं से जूझ रहा है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय और रक्षा विशेषज्ञों ने हमेशा से दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि भारत अपनी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा, चाहे चीन का प्रोपेगंडा कितना भी तेज क्यों न हो।
भारतीय सामरिक विशेषज्ञों और नेताओं का कड़ा पलटवार
चीनी मीडिया के इस तंज और बयानबाजी के बाद देश के वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञों और राजनेताओं ने भी करारा जवाब दिया है। जानकारों का कहना है कि चीन अपने ही देश की आर्थिक मंदी, आंतरिक असंतोष और पड़ोसी देशों के साथ चल रहे सीमा विवादों से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहा है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में लद्दाख सेक्टर में जिस तरह से सड़कों, सुरंगों, फॉरवर्ड एयरबेस और आधुनिक सैन्य साजो-सामान का जाल बिछाया है, उससे चीनी सेना पीएलए (PLA) के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। भारत की इस सैन्य और बुनियादी ढांचे की मजबूती से बौखलाया हुआ चीन अब मीडिया के जरिए मानसिक दबाव बनाने की असफल कोशिश कर रहा है, जिसे भारत की जनता और नेतृत्व भली-भांति समझता है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत का रुख एकदम स्पष्ट और अडिग
लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा के मुद्दों पर भारत की नीति हमेशा से बहुत स्पष्ट रही है कि जब तक सीमा पर पूरी तरह से शांति और यथास्थिति बहाल नहीं होती, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते। चीन के प्रोपेगंडा अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' के ऐसे बयानों से भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। भारत सरकार देश की एक इंच जमीन पर भी किसी बाहरी ताकत को बुरी नजर नहीं डालने देगी। चाहे ड्रैगन कितनी भी मनोवैज्ञानिक चालें चल ले, भारतीय सेना हर मोर्चे पर मुस्तैद है और देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से समर्पित है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि चीन भारत की आंतरिक राजनीति पर पैनी नजर रखे हुए है, जिसका माकूल जवाब भारत की कूटनीति और मजबूत सेना समय-समय पर देती रही है।