बांग्लादेशी नागरिकों के लिए आखिरकार खड़े हुए तारिक रहमान, सऊदी से मांगे 6 सवालों के जवाब

बांग्लादेशी नागरिकों के लिए आखिरकार खड़े हुए तारिक रहमान, सऊदी से मांगे 6 सवालों के जवाब

पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कूटनीतिक रिश्तों में उस वक्त अचानक भारी भूचाल आ गया जब सऊदी अरब के मक्का में दो बांग्लादेशी नागरिकों को गुपचुप तरीके से दी गई मौत की सजा का सच सामने आया। इस विवादित और खौफनाक घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश सरकार और प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कड़ा रुख अपनाते हुए सऊदी प्रशासन के सामने 6 चुभते हुए सवाल खड़े कर दिए हैं। ढाका द्वारा भेजे गए इस कड़े कूटनीतिक पत्र (Diplomatic Note) के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय हलकों में भारी खलबली मच गई है। आइए जानते हैं कि मक्का में ऐसा क्या हुआ जिसने दो देशों के पुराने संबंधों के बीच तनाव की एक नई और गहरी खाई खोद दी है।

मक्का की पवित्र मस्जिद में कथित 'अनैतिक काम' और गुपचुप फांसी का सच

सऊदी अरब के मक्का शहर स्थित मस्जिद अल-हरम में सफाईकर्मी के रूप में काम करने वाले बांग्लादेशी नागरिक नजरुल इस्लाम और महिला स्वीटी अख्तर को सऊदी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था। सऊदी मीडिया और अदालती आदेशों में उन पर मस्जिद के भीतर कथित 'अनैतिक कृत्य' (Immoral Act) करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों को ताजीर (Tazir) कानून के तहत दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुना दी गई और 14 अक्टूबर को बिना बांग्लादेशी सरकार या परिवार को पूर्व सूचना दिए चुपचाप फांसी पर चढ़ा दिया गया। जब उनके परिवारों को फोन पर अचानक मौत की खबर मिली, तो बांग्लादेश में गम और भारी आक्रोश की लहर दौड़ गई।

तारिक रहमान सरकार का बड़ा हमला: सऊदी अरब से पूछे ये 6 कड़े सवाल

अपने नागरिकों के खिलाफ हुई इस गुप्त कार्रवाई से भड़के बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के निर्देश पर जेद्दा स्थित महावाणिज्य दूतावास ने सऊदी विदेश मंत्रालय को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर 6 तीखे सवाल दागे हैं। बांग्लादेश ने पूछा है कि दोनों का वास्तविक अपराध क्या था और यह कहां घटित हुआ? दूसरा, गिरफ्तारी की सटीक तारीख क्या थी? तीसरा, क्या दोनों के पास मुकदमे के दौरान कोई निष्पक्ष वकील या कानूनी मदद मौजूद थी? चौथा, सजा देने का तरीका क्या था और क्या उनका सरेआम कत्ल किया गया? पांचवां, प्रमाणित अदालती फैसले की कॉपी कहां है? और छठा, सजा के बाद उनके शवों को परिवार को सौंपा जाएगा या सऊदी में ही दफना दिया गया?

बिना राजनयिक सूचना के मौत की सजा पर मानवाधिकार संगठनों का भारी आक्रोश

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कूटनीतिक विशेषज्ञों ने सऊदी अरब की इस गोपनीय न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नियमानुसार, किसी भी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार करने या सजा सुनाने पर संबंधित देश के कांसुलेट को जानकारी देना अनिवार्य होता है ताकि उन्हें लीगल एड और कांसुलर सहायता मिल सके। लेकिन सऊदी अधिकारियों ने सितंबर की जेल सूची में केवल मामूली अपराधों का जिक्र किया था और मौत की सजा की भनक तक बांग्लादेशी दूतावास को नहीं लगने दी। इस घोर लापरवाही के कारण निर्दोष नागरिकों को अपना पक्ष रखने का कोई मौका ही नहीं मिल सका।

खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों प्रवासियों की सुरक्षा पर गहराया बड़ा संकट

सऊदी अरब में करीब 25 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए मजदूरी और अन्य काम कर रहे हैं। मक्का में घटी इस खौफनाक घटना के बाद से ही खाड़ी देशों में रहने वाले सभी विदेशी मजदूरों के दिलों में अपनी सुरक्षा और अधिकारों को लेकर गहरा डर बैठ गया है। बांग्लादेश सरकार द्वारा उठाए गए इस साहसिक कदम को प्रवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। अब पूरी दुनिया की निगाहें रियाद के आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं कि वह बांग्लादेश के इन 6 बुनियादी और संवैधानिक सवालों का क्या जवाब देता है।