अचानक मुड़ने की ताकत और महीनों अंतरिक्ष में रहने का दम, जानिए चीन के सीक्रेट स्पेसप्लेन की वो खूबियां जिससे डरा अमेरिका
अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाइयों और अत्याधुनिक सामरिक तकनीक की दौड़ में इन दिनों दुनिया की दो महाशक्तियों—अमेरिका और चीन—के बीच एक बेहद खामोश लेकिन खौफनाक जंग छिड़ी हुई है। इस जंग का मुख्य केंद्र चीन का वह रहस्यमयी और गोपनीय 'सीक्रेट स्पेसप्लेन' (Secret Spaceplane) है, जिसने पेंटागन और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की नींद उड़ा कर रख दी है। चीन ने इस मानवरहित अंतरिक्ष यान को इस तरह से डिजाइन किया है कि यह पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में महीनों तक बिना किसी बाहरी मदद के अंतरिक्ष में तैर सकता है, और सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके पास अचानक अपनी दिशा बदलने (Sudden Orbital Maneuvering) की अद्भुत और अचंभित करने वाली ताकत है। अंतरिक्ष में घूमते हुए अचानक अपनी ट्रेजेक्ट्री बदल लेने की इस खूबी के कारण अमेरिकी रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी इसे ट्रैक करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इस रहस्यमयी स्पेसप्लेन की सफल उड़ानों ने वैश्विक रक्षा विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या ड्रैगन अंतरिक्ष के रास्ते दुनिया के किसी भी कोने पर अचानक अचूक हमला करने की तैयारी कर रहा है।
अंतरिक्ष में महीनों बिताने और बिना पायलट के लंबी खूफिया उड़ानों का दम
चीन के इस गुप्त स्पेसप्लेन के बारे में जो सबसे हैरान करने वाली बात सामने आई है, वह इसकी लंबी अवधि तक अंतरिक्ष में बने रहने की क्षमता है। पारंपरिक रॉकेट और अंतरिक्ष यान कुछ दिनों या हफ्तों का मिशन पूरा करके वापस धरती पर लौट आते हैं, लेकिन चीन का यह मानवरहित अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष के कठोर और शून्य गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में बिना उतरे लगातार कई महीनों—और कई बार तो 250 से अधिक दिनों—तक अंतरिक्ष की परिक्रमा करता रहता है। इस दौरान यह यान क्या कर रहा है और किस तरह के गुप्त परीक्षणों को अंजाम दे रहा है, इसकी भनक तक दुनिया के बाकी देशों को नहीं लग पाती। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्पेसप्लेन के जरिए चीन अंतरिक्ष में अपने जासूसी तंत्र को मजबूत करने और भविष्य के स्टार वार्स (Star Wars) के लिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को परखने का बड़ा अभियान चला रहा है।
अचानक मुड़ने और दिशा बदलने की घातक खूबी: अमेरिकी रडार भी खा रहे हैं चकमा
इस स्पेसप्लेन की सबसे बड़ी ताकत और अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द इसकी तीव्र और अप्रत्याशित रूप से कक्षा बदलने की क्षमता है। अंतरिक्ष में सामान्यतः उपग्रह (Satellites) एक तयशुदा और निश्चित कक्षा (Orbit) में चक्कर काटते हैं, जिन्हें आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। लेकिन चीन का यह सीक्रेट स्पेसप्लेन अंतरिक्ष में चलते-चलते अचानक अपनी दिशा, ऊंचाई और गति में बड़ा बदलाव कर सकता है। जब तक अमेरिकी डिफेंस रडार इसकी पुरानी स्थिति को मापते हैं, तब तक यह यान अपनी पोजीशन बदलकर किसी दूसरी जगह पहुंच चुका होता है। अचानक मुड़ने की इस बेजोड़ ताकत के कारण इसे आसमान का 'निंजा' भी कहा जाने लगा है, जो दुश्मन की नजरों से बचकर चुपचाप अपने सामरिक लक्ष्यों को साधने की कुब्बत रखता है।
पेंटागन में क्यों मची है खलबली? अंतरिक्ष में चीन की बढ़ती दबंगई से डरा अमेरिका
चीन के इस अंतरिक्ष वाहन की हरकतों को देखकर अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन और यूएस स्पेस फोर्स (US Space Force) के आला अधिकारियों की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। अमेरिका को सबसे बड़ा डर इस बात का सता रहा है कि चीन इस स्पेसप्लेन का इस्तेमाल अंतरिक्ष में मौजूद अमेरिकी सैन्य और जासूसी उपग्रहों को निशाना बनाने, उनकी जासूसी करने या उन्हें निष्क्रिय (Disable) करने के लिए कर सकता है। आधुनिक युद्ध रणनीतियों में अंतरिक्ष में बैठा उपग्रह ही जमीन पर युद्ध की दिशा तय करता है। यदि कोई ऐसा हथियार अंतरिक्ष में घूम रहा हो जो दुश्मन के सैटेलाइट्स के पास चुपचाप पहुंचकर उन्हें तबाह कर सके, तो पूरी वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है। यही वजह है कि अमेरिका इस चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रम को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा और आसन्न खतरा मान रहा है।
भविष्य के अंतरिक्ष युद्ध और स्पेस वेपनलाइजेशन की अनसुनी कहानी
चीन के इस सीक्रेट स्पेसप्लेन का सफल परीक्षण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब आने वाले युद्ध केवल धरती, समुद्र या आसमान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अंतरिक्ष (Outer Space) युद्ध का सबसे बड़ा अखाड़ा बनने जा रहा है। अंतरिक्ष का सैन्यीकरण (Weaponization of Space) रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही कई संधियां और समझौते किए गए हों, लेकिन चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियां परदे के पीछे एक-दूसरे को मात देने के लिए लगातार अपने गुप्त अंतरिक्ष कार्यक्रमों को धार दे रही हैं। चीन का यह स्पेसप्लेन न केवल उसकी तकनीकी और वैज्ञानिक ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि ड्रैगन अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के मामले में अब अमेरिका को कड़ी टक्कर देने या उससे एक कदम आगे निकलने की स्थिति में आ चुका है।
वैश्विक कूटनीति पर इस खामोश अंतरिक्ष जंग का गहराता प्रभाव
जैसे-जैसे चीन के इस गुप्त स्पेसप्लेन की उड़ानें और उनकी क्षमताएं दुनिया के सामने आ रही हैं, वैसे-वैसे वैश्विक कूटनीति में तनाव और गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अंतरिक्ष सुरक्षा नियमों को और अधिक कड़ा बनाने की मांग उठने लगी है। हालांकि, चीन अपने इस अंतरिक्ष कार्यक्रम को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research) का हिस्सा बताता है, लेकिन दुनिया का कोई भी देश उसके इस दावे पर आंख मूंदकर भरोसा करने को तैयार नहीं है। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी इस चीनी अंतरिक्ष चुनौती का मुकाबला करने के लिए अपनी कौन सी नई रणनीतिक तकनीक सामने लाते हैं।