नाटो और रूस के बीच छिड़ी अब तक की सबसे खतरनाक जुबानी जंग

नाटो और रूस के बीच छिड़ी अब तक की सबसे खतरनाक जुबानी जंग

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, वैश्विक राजनीति और वैश्विक सुरक्षा के मोर्चे से इस वक्त एक बेहद डरावनी, चौंकाने वाली और पूरे विश्व में तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की सुगबुगाहट तेज कर देने वाली खबर सामने आ रही है। उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो (NATO) के सुप्रीम एलाइड कमांडर ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और मॉस्को प्रशासन को सीधी और खुली चुनौती जारी करते हुए कहा है कि नाटो के सैन्य बल और मित्र देश आज रात से ही रूस के खिलाफ पूर्ण युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं। नाटो के इतने शीर्ष और उच्चस्तरीय सैन्य अधिकारी की तरफ से इस प्रकार का आक्रामक और सीधा बयान आना यह साबित करता है कि यूरोप और रूस की सीमाओं पर स्थितियां किस कदर गंभीर और बेकाबू हो चुकी हैं। इस बयान के बाद से न केवल वाशिंगटन और ब्रसेल्स में हलचल तेज हो गई है, बल्कि पूरे वैश्विक शेयर बाजारों और रक्षा जगत में चिंता की एक गहरी लहर दौड़ गई है।

आखिर क्यों दिया नाटो कमांडर ने ऐसा आक्रामक बयान और यूरोप-रूस सीमा पर क्या बने हैं मौजूदा हालात?

नाटो के शीर्ष कमांडर द्वारा दिया गया यह तीखा बयान अचानक से नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के लगातार खींचने और पूर्वी यूरोप में नाटो की सीमाओं के पास रूसी वायुसेना व मिसाइल गतिविधियों का बढ़ना प्रमुख कारण माना जा रहा है। हाल के दिनों में पोलैंड, रोमानिया और बाल्टिक देशों (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) की हवाई सीमाओं के करीब रूसी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों की बढ़ती मौजूदगी ने नाटो देशों की चिंता बढ़ा दी थी। इसके जवाब में नाटो ने अपनी पूर्वी सीमा पर हजारों अतिरिक्त सैनिकों, आधुनिक लड़ाकू विमानों और एयर डिफेंस सिस्टम्स की तैनाती कर दी है। कमांडर ने अपने वक्तव्य में साफ तौर पर कहा कि अगर रूस ने गलती से भी नाटो के किसी एक सदस्य देश की संप्रभुता या एक इंच जमीन का भी उल्लंघन करने का दुस्साहस किया, तो नाटो संधि के अनुच्छेद 5 (Article 5) के तहत उसे ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा जिसके लिए मॉस्को तैयार नहीं होगा।

रूस-यूक्रेन मोर्चे पर परमाणु धमकियों और सैन्य गश्त से बढ़ी तल्खी, पुतिन की प्रतिक्रिया का इंतजार

रूस और पश्चिमी देशों के बीच संबंध शीत युद्ध (Cold War) के दौर से भी निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके रक्षा अधिकारियों द्वारा बार-बार दी जाने वाली रणनीतिक परमाणु चेतावनियों (Nuclear Threats) के बाद पश्चिमी देश अपनी रक्षात्मक रणनीति को और अधिक आक्रामक बनाने में जुट गए हैं। नाटो कमांडर की इस 'टुनाइट फाइट' (Fight Tonight) वाली सीधी चेतावनी को रूसी दावों का मुकाबला करने और अपने सहयोगियों को मानसिक व सैन्य रूप से आश्वस्त करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि नाटो की यह कड़ी बयानबाजी असल में एक रणनीतिक संतुलन और निरोधक (Deterrence) के तौर पर काम करती है, ताकि रूस नाटो क्षेत्र में किसी भी प्रकार की दुस्साहसपूर्ण कार्रवाई करने से पहले सौ बार सोचे। इस तीखे बयान के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें मॉस्को की ओर टिक गई हैं कि राष्ट्रपति पुतिन और रूसी रक्षा मंत्रालय इस पर क्या पलटवार करते हैं।

तीसरे विश्व युद्ध की आहट से दुनिया भर के बाजारों में मंदी की आशंका, कूटनीतिक हल निकालने की मांग

दो महाशक्तियों के बीच लगातार बढ़ते इस गंभीर सैन्य तनाव का सीधा असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव, शेयर बाजारों में अचानक आई गिरावट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर मंडराते संकट ने दुनिया के विकासशील और विकसित दोनों तरह के देशों को चिंतित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और कई मध्यस्थ देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने, भड़काऊ बयानों से बचने और टेबल पर बैठकर बातचीत के जरिए मामलों को सुलझाने की अपील की है। हालांकि, मौजूदा जमीनी हकीकत यह बता रही है कि जब तक दोनों तरफ से सैन्य जमावड़ा और रणनीतिक बयानबाजी कम नहीं होती, तब तक वैश्विक शांति पर यह काला साया मंडराता रहेगा।