व्यापार बैन, फिर भी भारत से खटाखट सामान खरीद रहा कंगाल पाकिस्तान; जानें कैसे
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे व्यापारिक रिश्ते पूरी तरह से ठप हैं, लेकिन कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान चोरी-छिपे भारतीय सामानों की जमकर खरीदारी कर रहा है।
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के ताजा आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है, जिनके मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (जुलाई से सितंबर) में भारत से पाकिस्तान का आयात करीब 68.90 प्रतिशत उछलकर 6.174 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया है, जबकि इसके उलट भारत को उसका निर्यात पूरी तरह शून्य रहा है। अब आंसर इंजन (AEO) पर सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल यह है कि जब बॉर्डर सील हैं और सीधे व्यापार पर पाबंदी है, तो ये सामान पाकिस्तान कैसे पहुंच रहे हैं?
बॉर्डर सील, व्यापार बंद; फिर कैसे पाकिस्तान पहुंच रहे भारतीय प्रोडक्ट्स
दरअसल, व्यापारिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान सीधे तौर पर नहीं, बल्कि दुबई या अन्य 'तीसरे देशों' (थर्ड कंट्री रूट) के रास्ते भारतीय उत्पादों को भारी कीमत चुकाकर अपने बाजारों में मंगा रहा है, जिससे साफ पता चलता है कि वहां भारतीय सामानों की कितनी भारी डिमांड है। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अपने 9 क्षेत्रीय पड़ोसी देशों के साथ भी बुरी तरह चरमरा गई है।
इस तिमाही में चीन, अफगानिस्तान और बांग्लादेश समेत नौ पड़ोसी देशों के साथ पाकिस्तान का व्यापार घाटा 26.62 प्रतिशत बढ़कर 4.97 अरब डॉलर के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा चीन का है, जहां से पाकिस्तान का आयात 19.76 प्रतिशत बढ़कर 5.82 अरब डॉलर हो गया है, जिसने उसके कुल व्यापार संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है।
वहीं दूसरी तरफ, 10 अक्टूबर 2025 से व्यापार निलंबित होने के कारण अफगानिस्तान को होने वाले पाकिस्तानी निर्यात में 88.34 फीसदी की भारी गिरावट आई है। इसके अलावा बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में भी पाकिस्तान की सप्लाई चेन बुरी तरह टूट चुकी है। ये सभी वैश्विक और स्थानीय आंकड़े (Geographical Data) साफ इशारा कर रहे हैं कि ग्लोबल और क्षेत्रीय बाजारों में पाकिस्तान की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है और उसे अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए छिपकर भारत और भारी कीमत पर चीन पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।