US-Iran War Alert: "अगला हफ्ता ईरान के लिए तबाही लाएगा..." राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम— डील करो वरना उड़ा देंगे सारे पावर प्लांट और पुल!
अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी और सीधी चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान तुरंत बातचीत की मेज पर नहीं आता और अमेरिका की शर्तों पर समझौता (Deal) नहीं करता, तो अगले हफ्ते से अमेरिकी सेना ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) जैसे पावर ग्रिड, बिजली संयंत्रों (Power Plants) और मुख्य पुलों (Bridges) को पूरी तरह तबाह करना शुरू कर देगी।
राष्ट्रपति ट्रंप के इस नए और आक्रामक अल्टीमेटम के बाद खाड़ी देशों (Gulf Countries) सहित पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका इन ठिकानों पर हमला करता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है।
"अगला हफ्ता ईरान के लिए बहुत बुरा होने वाला है" — फॉक्स न्यूज इंटरव्यू में ट्रंप की गर्जना
फॉक्स न्यूज (Fox News) को दिए एक ताजा इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अपने हमले तेज करने की मंशा साफ कर दी। उन्होंने कहा:
"अगला हफ्ता उनके (ईरान) के लिए बहुत बुरा होने वाला है, क्योंकि अगले हफ्ते उनके पावर प्लांट्स का नंबर आएगा। अगले हफ्ते उनके पुलों का नंबर आएगा। हम उनके सभी बिजली संयंत्रों को ठप कर देंगे। हम उनके सभी पुलों को उड़ा देंगे, बशर्ते वे टेबल पर आएं और बातचीत करें।"
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सेना लगातार चौथे दिन भी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी ठिकानों पर हवाई हमले कर रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने पर अड़ा अमेरिका
इस पूरे युद्ध और गतिरोध की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर है। दरअसल, यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20% हिस्सा नियंत्रित करता है। ईरान द्वारा इस रूट पर व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका और इजरायल ने मिलकर मोर्चा खोल दिया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि उनके हमले केवल वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान की हमला करने की क्षमता को कमजोर करने के लिए हैं। वहीं, ट्रंप का कहना है कि बिना किसी शर्त के इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलना और परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की शर्तों को मानना ही जंग रोकने का एकमात्र रास्ता है।
युद्ध अपराध के आरोपों पर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
अंतरराष्ट्रीय कानूनों और 1949 के जिनेवा कन्वेंशन (Geneva Conventions) के तहत युद्ध के दौरान किसी भी देश के नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे बिजली, पानी के स्रोतों और पुलों पर हमला करना प्रतिबंधित है और इसे 'युद्ध अपराध' (War Crime) की श्रेणी में रखा जाता है। दर्जनों अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों ने पहले ही ट्रंप के इन फैसलों को लेकर चेतावनी जारी की है।
जब संवाददाताओं ने ट्रंप से पूछा कि क्या वे इन हमलों के बाद युद्ध अपराध के आरोपों से चिंतित हैं, तो उन्होंने बेफिक्री दिखाते हुए कहा, "मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है। मैं बस उम्मीद करता हूं कि मुझे ऐसा (हमला) न करना पड़े और वे पहले ही समझौता कर लें।"
ईरान का पलटवार: "पूरे क्षेत्र के तेल ढांचे को कर देंगे तबाह"
अमेरिकी धमकियों के बीच ईरान ने भी घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान की संसद के स्पीकर बागेर गालीबाफ और वहां के सैन्य जनरलों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उनके बिजली घरों या नागरिक बुनियादी ढांचों को छुआ, तो वे जवाबी कार्रवाई में पूरे खाड़ी क्षेत्र (Middle East) के तेल और ऊर्जा ढांचे को 'अपरिवर्तनीय' रूप से नष्ट कर देंगे। ऐसे में अगर दोनों देश अपनी जिद पर अड़े रहे, तो आने वाले दिनों में यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की शक्ल अख्तियार कर सकता है।