US Iran War: अमेरिकी दादागिरी पर ईरान का दहलाने वाला महा-पलटवार; बोला- या तो सबको तेल बेचने दो, वरना खाड़ी में ला देंगे प्रलय!

US Iran War: अमेरिकी दादागिरी पर ईरान का दहलाने वाला महा-पलटवार; बोला- या तो सबको तेल बेचने दो, वरना खाड़ी में ला देंगे प्रलय!

अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध अब विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पावर ग्रिडों, बिजली संयंत्रों और मुख्य पुलों को पूरी तरह तबाह करने के कड़े अल्टीमेटम के बाद अब ईरान ने वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक महा-पलटवार किया है।

ईरानी नेतृत्व और सैन्य कमांडरों ने सीधे तौर पर वाशिंगटन को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि वे अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों के आगे बिल्कुल नहीं झुकेंगे। ईरान ने दो टूक लहजे में कहा है कि या तो खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) के सभी देशों को शांति से अपना तेल निर्यात करने दिया जाए, या फिर पूरे क्षेत्र के ऊर्जा नेटवर्क को मटियामेट कर ऐसी तबाही मचाई जाएगी जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह घुटनों पर आ जाएगी।

"या तो सबका तेल बिकेगा, या फिर मचेगी महा-तबाही" - ईरान की खुली चेतावनी

तेहरान की ओर से आए इस आक्रामक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। ईरान की संसद के स्पीकर और शीर्ष सैन्य रणनीतिकारों ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका को सीधी चुनौती दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों और हवाई हमलों के जरिए तेल निर्यात करने से रोका गया, तो वे भी खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों को एक बूंद तेल बाहर नहीं भेजने देंगे। ईरान ने सीधे तौर पर संकेत दिया है कि वह मध्य पूर्व के पूरे ऊर्जा और तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके बाद पूरी दुनिया में तेल संकट और हाहाकार मच सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग का सबसे बड़ा अखाड़ा

इस पूरे गतिरोध का केंद्र बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्गों में से एक है। पूरी दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिका और इजरायल इस समुद्री रास्ते पर अपना पूर्ण नियंत्रण और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता और रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह इस पूरे जलमार्ग को ब्लॉक कर देगा, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो जाएगी।

ट्रंप की धमकी और ईरान की 'नो सरेंडर' पॉलिसी

यह महा-टकराव तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को केवल एक हफ्ते का समय देते हुए कहा था कि यदि वे समझौते की मेज पर नहीं आए, तो अमेरिकी सेना उनके बिजली घरों और पुलों को उड़ाना शुरू कर देगी। ट्रंप के इस बयान को ईरान ने अमेरिकी दादागिरी करार दिया है। सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की 'नो सरेंडर' यानी घुटने न टेकने की नीति और अमेरिका का अड़ियल रुख दोनों देशों को एक ऐसे भीषण युद्ध की ओर धकेल रहा है, जिसकी लपटें केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया के शेयर बाजारों और ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा।

Latest Posts