हाथ में चाबुक, सड़कों पर हथियारों का खौफ! तालिबान की नैतिकता पुलिस के इस खौफनाक एक्शन से अफगानिस्तान में मचा हड़कंप
अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों और उनकी आजादी का दम घोंटने का एक और बेहद डरावना और दमनकारी मामला सामने आया है। तालिबान शासन के सबसे क्रूर माने जाने वाले 'नैतिकता प्रचार एवं दुराचार निवारण मंत्रालय' (PVPV) की सशस्त्र टीमों ने पश्चिमी अफगानिस्तान के सबसे बड़े और प्रमुख शहर हेरात में महिलाओं के खिलाफ एक बड़ा और सख्त ड्रेस कोड अभियान छेड़ दिया है। शनिवार को अचानक शहर के मुख्य चौराहों और सड़कों पर उतरे तालिबानी कारिंदों ने भारी आतंक मचाया। हथियारों और चाबुक से लैस इन कर्मचारियों ने चलते वाहनों को जबरन रोका, महिलाओं की बेरहमी से तलाशी ली और तालिबान द्वारा तय की गई 'चादर-बुर्का' न पहनने के आरोप में कई महिलाओं को वैन में ठूंसकर अज्ञात जगहों पर हिरासत में ले लिया। इस क्रूरता के बाद पूरे हेरात शहर में दहशत और हड़कंप का माहौल है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएएमए ने जताई गहरी चिंता, तालिबान से मनमानी गिरफ्तारी रोकने की मांग की
तालिबान की इस ताजा बर्बरता पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने रविवार को हेरात में महिलाओं की इस तरह की जा रही धरपकड़ पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। यूएनएएमए ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हेरात शहर में तथाकथित ड्रेस कोड का पालन न करने का मनगढ़ंत आरोप लगाकर कई महिलाओं को अवैध रूप से गिरफ्तार कर हिरासत में रखा गया है, जो मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान प्रशासन से तुरंत अपील की है कि वे महिलाओं के मौलिक अधिकारों और उनकी गरिमा का सम्मान करें तथा इस तरह की मनमानी और क्रूर हिरासत की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाएं।
'हिजाब और नकाब पहना था, फिर भी चाबुक दिखाकर वैन में ठूंस दिया'— प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किया आंखों देखा खौफ
स्थानीय निवासियों और पीड़ित महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी एएफपी (AFP) को नाम न छापने की शर्त पर जो आपबीती सुनाई है, वह रूह कंपा देने वाली है। एक 23 वर्षीय चश्मदीद युवती ने बताया कि सड़कों पर पीवीपीवी के अधिकारी खुलेआम हाथों में चाबुक और आधुनिक हथियार लेकर घूम रहे थे और बसों, टैक्सियों व निजी गाड़ियों को रोककर महिलाओं की पोशाक की जांच कर रहे थे। उसने देखा कि दो महिलाओं ने हिजाब, नकाब और अबाया (लंबा ढीला ढाला गाउन) पहना हुआ था, लेकिन उनके पास पारंपरिक 'चादर' नहीं थी। सिर्फ इसी बात पर तालिबानी अधिकारियों ने उन्हें चाबुक का डर दिखाकर जबरन खींचते हुए वैन में बंद कर दिया। शहर की एक अन्य 27 वर्षीय महिला ने बताया कि उसने खुद अपनी आंखों से 8-10 महिलाओं को इसी तरह सरेआम सड़क से उठाए जाते देखा, जिसके बाद पूरा इलाका खौफ के साए में डूब गया है।
सूनी हो गईं हेरात की सड़कें, डरे हुए टैक्सी ड्राइवरों को भी तालिबान का कड़ा अल्टीमेटम
इस औचक और दमनकारी अभियान के शुरू होते ही हेरात शहर से महिलाओं की आवाजाही पूरी तरह से खत्म हो गई है और महिलाएं खुद को घरों में कैद करने पर मजबूर हैं। एक 20 वर्षीय स्थानीय टैक्सी ड्राइवर ने बताया कि शहर में अब महिलाएं बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हैं। प्रशासन की तरफ से हमें (ड्राइवरों को) सख्त और सीधा आदेश दिया गया है कि अगर कोई भी महिला बिना तय की गई चादर या बुर्के के दिखती है, तो उसे गाड़ी में बिल्कुल न बैठाया जाए। अगर हमने किसी ऐसी महिला को बैठाया तो हमारे खिलाफ भी भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। एक बेबस 33 वर्षीय महिला ने रोते हुए कहा कि अब अफगानिस्तान में हमारे लिए आजादी से सांस लेने का भी अधिकार नहीं बचा है। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और नौकरियां तो पहले ही छीन ली गई थीं, अब घर से बाहर कदम रखना भी मौत की सजा जैसा बन गया है।
'यह अल्लाह का आदेश और देश का कानून है'— क्रूर कार्रवाई पर तालिबान मंत्रालय की बेशर्म सफाई
अगस्त 2021 में काबुल की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के बाद से तालिबान महिलाओं के अधिकारों को कुचलने के लिए लगातार नए-नए तुगलकी फरमान जारी कर रहा है। वर्तमान में पूरे अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर पूर्ण शारीरिक कवरेज अनिवार्य है, जिसमें हिजाब, नकाब, अबाया के साथ अब चादर-बुर्का भी जोड़ दिया गया है। इस पूरे मामले पर जब पीवीपीवी मंत्रालय के सूचना विभाग से महिलाओं को हिरासत में लेने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने किसी भी तरह की क्रूरता से साफ इनकार कर दिया। मंत्रालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी सफाई में कहा कि हेरात में कुछ भी असामान्य या नया नहीं हो रहा है। यह ड्रेस कोड अल्लाह का पवित्र आदेश और हमारे देश का कानून है। इसे हर हाल में पूरी कड़ाई से लागू करना हमारा धार्मिक और कानूनी कर्तव्य है।