Up Kiran, Digital Desk: भारत के लिए एक नए राजनीतिक और आर्थिक विवाद ने आकार लिया है, क्योंकि अमेरिका में 500% टैरिफ लागू करने का प्रस्ताव फिर से चर्चा में आया है। यह विवाद एक ऐसे बयान के कारण उठा है, जो अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दिया था। उनका कहना था कि भारत ने रूस से तेल की खरीद को बंद कर दिया, और इसके बाद अमेरिका को अब भारत पर कड़े टैरिफ लगाने की जरूरत नहीं रही। लेकिन क्या यह दावा सच है? क्या भारत ने सचमुच रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, या फिर यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान है?
भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया
स्कॉट बेसेंट ने अमेरिकी संसद में यह दावा किया कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया। उनका कहना था कि अमेरिकी दबाव के तहत भारत ने यह कदम उठाया, और इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह ‘टैरिफ डिप्लोमेसी’ का परिणाम था, जिसका उद्देश्य रूस से कारोबार को रोकना था। उनके अनुसार, भारत का यह कदम अमेरिकी विदेश नीति की सफलता है, और अब 500% टैरिफ जैसे कड़े कदम की कोई आवश्यकता नहीं है।
500% टैरिफ की योजना पर सवाल
बेसेंट के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत ने रूस से तेल की खरीद रोक दी, तो अमेरिका के लिए अब 500% टैरिफ लगाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। इस बयान का उद्देश्य यह दिखाना था कि भारत, जो पहले रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिकी दबाव में था, अब अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में सुधार करने के लिए तैयार है। ट्रंप प्रशासन की मुख्य चिंता यह थी कि भारत और चीन जैसे देश रूस के साथ व्यापार बढ़ाकर डॉलर के वर्चस्व को चुनौती दे सकते हैं और ‘डी-डॉलराइजेशन’ को बढ़ावा दे सकते हैं।
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