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Up Kiran, Digital Desk: चंडीगढ़ में स्मार्ट सिटी का सपना अब आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। शहर की सबसे आखिरी बड़ी कच्ची कॉलोनी धनास में बसी हुई है। करीब 10 एकड़ में फैली इस बस्ती में 800 से ज्यादा झुग्गियां हैं। प्रशासन ने इन पर बुलडोजर चलाने की तैयारी पूरी कर ली है। अफसरों का कहना है कि जैसे ही ठंड खत्म होगी वैसे ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी। सर्दियों में ऐसा करने पर कोर्ट से स्टे मिलने का डर रहता है इसलिए अभी रुका हुआ है।

धनास की यह कॉलोनी किसानों की निजी जमीन पर बनी बताई जाती है। वहां रहने वाले लोग कहते हैं कि ये झुग्गियां नहीं बल्कि किराए के अस्थायी शेड हैं। उनका दावा है कि मकान मालिकों ने खुद रहने की इजाजत दी थी। लोग गुस्से में हैं और पूछ रहे हैं कि सरकार ने 2022 तक सबको पक्का मकान देने का वादा किया था वो कब पूरा होगा? अब बेदखली के बाद उनका पुनर्वास कौन करेगा?

दूसरी तरफ किसान खुश हैं। वे कह रहे हैं कि उनकी जमीन खेती लायक नहीं थी इसलिए किराए पर दे दी थी। अब वे पूरी जमीन प्रशासन को सौंपने को तैयार हैं बशर्ते लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत मुआवजा मिले।

इस साल चंडीगढ़ प्रशासन रिकॉर्ड तोड़ रहा है। एक के बाद एक बड़ी-बड़ी कॉलोनियां जमींदोज कर दी गईं। अप्रैल में संजय कॉलोनी गई जिसमें 1200 झुग्गियां थीं और 6 हजार लोग बेघर हुए। मई में जनता कॉलोनी को हटाया जिसमें ढाई हजार झुग्गियां थीं और दस हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। जून में आदर्श कॉलोनी से 12 एकड़ की 350 करोड़ की जमीन खाली कराई। जुलाई में फर्नीचर मार्केट हटाई जिससे 10 एकड़ जगह मिली। सितंबर में सेक्टर 38 की शाहपुर कॉलोनी गई जिसमें 250 करोड़ की जमीन मुक्त हुई।

अब तक प्रशासन ने हजारों करोड़ रुपए की सरकारी और निजी जमीन से अवैध कब्जे हटवा चुका है। दोबारा कब्जा न हो इसके लिए हर इलाके में अफसरों की टीमें तैनात कर दी गई हैं। उनकी जिम्मेदारी फिक्स कर दी गई है कि उनकी नाक के नीचे कोई नया अतिक्रमण न होने पाए।