बैंक ऑफ इंडिया में एमडी वन निगम के नाम से खुले खाते और उसमे एफडी बनाने के लिए ट्रांसफर की गयी 64 करोड़ 82 लाख की धनराशि को हड़पने की साजिश नए वित्त अधिकारी की सक्रियता के चलते नाकाम भले ही हो गयी लेकिन साजिशकर्ता अभी भी पकड़ से दूर हैं। हालाँकि अब इस साजिश में शामिल साजिशकर्ताओं का खुलासा जल्द ही होने की सम्भावना है। बैंक ने सक्रियता दिखाते हुए तथाकथित फर्जी अकाउंट से कई अलग अलग खातों में ट्रांसफर की गयी धनराशि में से अधिकांश धनराशि को ब्लॉक करवा दिया है वही अभी एक से डेढ़ करोड़ की धनराशि की छानबीन कर रिकवर करने में दिनरात लगी हुई है। मामला पे इंफोर्स्मेंट एजेंसी की पूरी नजर है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एमडी वन निगम उत्तर प्रदेश के नाम से खोले गए खाते में सात करोड़ की धनराशि अलग अलग खातों में ट्रांसफर करवाने में साजिशकर्ता सफल रहे लेकिन खाते से पैसे निकलते इसके पहले ही बैंक ऑफ इंडिया की टीम ने उन एकाउंट्स में भेजी गयी धनराशि को ब्लॉक करवा दिया। मामले में बैंक की इंटरनल इन्क्वाइरी तो चल ही रही है जिसमे बैंक इस बात की छानबीन में जुटा हुआ है क्या इस स्कैम में बैंक का कोई कर्मचारी तो मिला नहीं है ? इस मामले की पूरी रिपोर्ट थाना कैंट में मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर बैंक ऑफ इंडिया में पहले ही दे दी थी साथ ही केंद्रीय जाँच एजेंसी / इंफोर्स्मेंट एजेंसी को भी तत्समय ही रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है।

एक तरफ फर्जी एकाउंट/ एफडी को लेकर वन निगम मीडिया की सुर्खियां बटोर रहा है वहीँ वन निगम एमडी अरविन्द कुमार सिंह के जोइनिंग के बाद से निगम में यकायक भ्रष्टाचार की जैसे बाढ़ सी आ गयी। निगम में हो रहे भ्रष्टाचार की पोल खुलने न पाए इसलिए एमडी वन निगम अरविन्द कुमार सिंह ने निगम की यूनियन से जुड़े कुछ नेताओं को नियम कानून ताक पर रखकर मलाईदार पोस्टिंग देते हुए उनका मुंह ही बंद कर दिया। गौरतलब है कि एक समय में निगम में होने वाले भ्रष्टाचार को लेकर वन निगम की यूनियन काफी मुखर हुआ करती थी, लेकिन लूट में शामिल होने के बाद यूनियन के पदाधिकारियों ने निगम में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर अपनी आँखे बंद कर ली। आइये जानते हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों की पोल न खुले इसके लिए यूनियन के किस पदाधिकारी को कौनसी मलाईदार पोस्टिंग दी -
इसमें सबसे पहला नाम आता है गौरव अमोली का जो प्रांतीय यूनियन के अध्यक्ष पद पर हैं जिनको नियम कानून ताक पर रखते हुए मार्केटिंग अफसर / विपणन अधिकारी का प्रभार दिया गया है जबकि गौरव अमोली लिपिकीय संवर्ग में सहायक ग्रेड 2 के बाबू मात्र हैं। इतना ही नहीं गौरव अमोली लोंगिंग में संविदा के प्रदेश भर में तैनात स्कलेर / चौकीदार की तैनाती का काम भी देखते हैं। गौरव अमोली को प्रदेश भर में दौरा करने के लिए एमडी द्वारा डीएलएम लखनऊ के यहाँ फोर व्हीलर गाड़ी उपलब्ध कराई जाती है। खबर के मुताबिक गौरव अमोली स्कलेर / चौकीदारों की पोस्टिंग मनमाने तरीके करते हैं और पोस्टिंग की आड़ में इनके द्वारा वसूली की जाती है जोकि विवेचना का विषय है।
दूसरा नाम है दिलीप कुमार शुक्ल का जोकि विपणन शाखा में तैनात हैं हालाँकि पूर्व एमडी द्वारा द्वारा इनका ट्रांसफर उद्योग शाखा में कर दिया था लेकिन वहां इनका मन नहीं लगा और फिर जैसे तैसे ये दुबारा विपणन शाखा में तैनाती पाने में सफल हो गए। दिलीप कुमार शुक्ल पूरे प्रदेश भर फारेस्ट प्रोडक्ट का पूरा प्रभार देखते हैं। प्रदेश भर में नियम-कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए खड़े पेड़ों की नीलामी से लेकर तेंदूपत्ता के जंगलों की नीलामी का पूरा काम दिलीप कुमार शुक्ला ही देखते हैं। खड़े पेड़ों की नीलामी और तेंदूपत्ता के जंगलों की नीलामी की यदि जाँच यदि किसी स्वतंत्र एजेंसी से हो जाये तो इन्हों दोनों मामलों में ही सैकड़ों करोड़ का स्कैम पकड़ में आ जायेगा।
तीसरा नाम अनूप कुमार मिश्रा सहायक वर्ग 2 का है जो यूनियन में मुख्यालय शाखा के मंत्री हैं जिन्हे मुख्यालय की कॉलोनी के मेंटेनेंस का प्रभार दिया गया है ,मेंटिनेंस के नाम से मुख्यालय में हो रही धांधली किसी से छुपी नहीं है। मेंटिनेंस के नाम पर कॉलोनी में जितने भी कार्य हो रहे हैं उनका बजट किस मद से है , सब विवेचना का विषय है।
अगला नाम काशेन्द्र सिंह का आता है ये भी सहायक वर्ग 2 के लिपिकीय संवर्ग के बाबू की श्रेणी में आते हैं जिन्हें एमडी अरविन्द कुमार सिंह ने अपने कैंप ऑफिस में तैनाती दी है जबकि एमडी के पास पूर्व से एक स्टेनो है। जानकारी के मुताबिक काशेन्द्र सिंह एमडी अरविन्द कुमार सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं ,इनका एमडी कैंप में सिर्फ इतना काम है कि एमडी के सारे पर्सनल काम या यूँ कह लें कि सारी डीलिंग का खाका तैयार करते हैं। डिवीज़न स्थित सभी कार्यालयों / डिपोज में होने वाले समस्त मेंटिनेंस का कार्यों का लेखा जोखा इनके द्वारा अन ओफ्फिशली देखा जाता है। काशेन्द्र सिंह की एमडी ऑफिस कैंप में क्या उपयोगिता है , विवेचना का विषय है। इन सबको लेकर एमडी अरविन्द कुमार सिंह से जब कोई सवाल पुछा जाता है तो हमेशा की तरह इस बार भी उन्होंने मौन धारण कर लिया।
वन निगम के धुरंधर पार्ट-2: यूनियन के अध्यक्ष गौरव अमोली ने बेंच दी वन निगम की लकड़ी, जानिए
क्रमश:




