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Up Kiran,Digital Desk: भारत के वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026 के बजट में एक महत्वपूर्ण ऐलान किया है, जिससे पूर्वी राज्यों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावना है। उनके द्वारा पेश किए गए बजट में सरकार ने 4000 इलेक्ट्रिक बसों को परिचालित करने का प्रस्ताव रखा है। इस फैसले का उद्देश्य न केवल प्रदूषण को कम करना है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट के विकल्प को सुधारना भी है।

पूर्वी राज्यों में शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों को मिलेगा लाभ

वित्तमंत्री ने कहा कि यह पहल विशेष रूप से बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों को लाभ पहुंचाएगी। इन राज्यों के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिससे ना सिर्फ यात्रा करना आसान होगा, बल्कि प्रदूषण भी कम होगा। इसके साथ ही यात्रियों को सस्ती और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन सेवाएं मिल सकेंगी।

सरकार की इलेक्ट्रिक बस योजना का प्रभाव

सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से एक ओर बात स्पष्ट हो रही है: डीजल बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग करने से पर्यावरणीय सुधार हो सकता है। इस कदम से प्रदूषण का स्तर घटेगा और ईंधन की लागत में भी कमी आएगी। साथ ही, इन बसों की मैन्युफैक्चरिंग और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

नई उद्योग संभावना: इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को मिलेगा फायदा

इस परियोजना से इलेक्ट्रिक वाहन और ऑटोमोबाइल कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र में बड़ा विकास हो सकता है। यह सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम है, बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी कारगर साबित हो सकता है।

इलेक्ट्रिक बसों के फायदे

प्रदूषण में कमी – इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग प्रदूषण को कम करेगा।

सस्ती परिवहन सुविधा – यात्रियों को किफायती और सुलभ ट्रांसपोर्ट विकल्प मिलेंगे।

स्थानीय रोजगार – इलेक्ट्रिक वाहन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

उद्योग को मिलेगी बढ़ोतरी – ई-बसों के उत्पादन और विकास से इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।