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Up kiran,Digital Desk : भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने 7 जनवरी को एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में एक ऐतिहासिक बयान साझा किया और कहा कि नेहरू को सोमनाथ मंदिर से “सबसे अधिक नफरत” थी। उनका यह बयान वर्तमान राजनीतिक माहौल में फिर से सुर्खियों में आ गया है, खासकर तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेने वाले हैं। 

त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नेहरू द्वारा सौंपे गए कुछ पुराने पत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्होंने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का समर्थन नहीं किया और कभी‑कभी विरोधाभासी रुख अपनाया। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मंदिर के बारे में कथित जानकारी दी और भारत की सांस्कृतिक विरासत को सही रूप में पेश नहीं किया। 

भाजपा का तर्क है कि महमूद गजनवी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे ऐतिहासिक आक्रांताओं से पहले भी सभ्यता के प्रतीक मंदिरों पर हुए हमलों का जिक्र होता रहा है, लेकिन नेहरू के रवैये को “सबसे अधिक नफरत” वाला बताया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि आज की राजनीतिक बहस में इतिहास और संस्कृति को लेकर नई तर्क‑बितर्क भी देखने को मिल रही है। 

कांग्रेस या अन्य दलों द्वारा इस आरोप का जवाब और विस्तृत प्रतिक्रिया अभी मीडिया के विमर्श का हिस्सा बनी हुई है। यह बयान ऐतिहासिक दृष्टिकोण और राजनीतिक रणनीतियों दोनों के लिहाज से चर्चा का विषय बना हुआ है।