Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के बीच ईरान ने भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश को बड़ी राहत दी है। ईरान की सुरक्षा परिषद ने बुधवार को कतर और सऊदी अरब से ईंधन लेकर आ रहे बांग्लादेश के छह जहाजों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) देने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश को बड़ी संजीवनी मिली है, क्योंकि वहां पेट्रोलियम और एलएनजी का भंडार तेजी से खत्म हो रहा था।
ईंधन संकट से उबरेगा बांग्लादेश: 5 लाख टन एलएनजी का रास्ता साफ
ढाका में ईरानी राजदूत जलील रहीमी जहानबादी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मानवीय फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि होर्मुज के रास्ते कतर से आ रही एलएनजी की पांच खेप (लगभग 5 लाख टन) और सऊदी अरब से कच्चे तेल की एक खेप (79,000 टन) को गुजरने की अनुमति दी गई है। राजदूत ने स्पष्ट किया कि ईरान नहीं चाहता कि बांग्लादेश के आम नागरिकों को युद्ध के कारण ईंधन की किल्लत या किसी अन्य मुश्किल का सामना करना पड़े। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से इस मार्ग पर आवाजाही ठप थी।
ईरान की नाराजगी: 'बांग्लादेश ने हमले की निंदा क्यों नहीं की?'
राहत देने के साथ-साथ ईरान ने बांग्लादेश के कूटनीतिक रुख पर अपनी निराशा भी जाहिर की है। ईरानी राजदूत जहानबादी ने कहा कि बांग्लादेश ने ईरान पर हुए इजरायली-अमेरिकी हमलों पर केवल 'चिंता' व्यक्त की, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की 'निंदा' नहीं की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "अगर बांग्लादेश इस आक्रामकता की कड़ी निंदा करता, तो हमें और अधिक खुशी होती।" ईरान का मानना है कि पिछले अमेरिकी प्रशासन ने खुद को इस जाल से बचाए रखा था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के उकसावे में आकर पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल पर बरसे ईरानी राजदूत
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरानी राजदूत ने सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन पूरी तरह से इजरायल के प्रभाव में काम कर रहा है, जिसके कारण खाड़ी क्षेत्र में शांति भंग हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा, लेकिन मित्र राष्ट्रों की मानवीय जरूरतों का सम्मान करना जारी रखेगा। बांग्लादेश ने इससे पहले विशेष अनुरोध कर अपने जहाजों को फंसे होने की जानकारी दी थी, जिस पर गौर करते हुए ईरान ने यह 'सेफ कॉरिडोर' देने का फैसला लिया है।




