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Up Kiran, Digital Desk: बिहार की सियासत में चुनावी सरगर्मी तेज होती जा रही है। इस बार का चुनाव कई तरह की कहानियों को जन्म दे रहा है—कहीं टिकट को लेकर नाराजगी, तो कहीं गुटबाजी का खुला प्रदर्शन। पटना में रविवार को एक ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला जब राजद के वरिष्ठ नेता मदन साह टिकट न मिलने से इतने आक्रोशित हो गए कि उन्होंने राबड़ी देवी के आवास के बाहर धरना दे दिया।

राबड़ी आवास के बाहर मदन साह का फटा हुआ कुर्ता और आंखों से बहते आंसू इस बात का सबूत थे कि उनकी नाराजगी अब दर्द बन चुकी थी। वे मधुबन विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन पार्टी ने अचानक संतोष कुशवाहा को उम्मीदवार बना दिया। इससे खफा मदन साह आवास के बाहर पहुंच गए और वहीं जमीन पर लेटकर विरोध जताने लगे।

प्रदर्शन के दौरान उन्होंने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उनसे टिकट के बदले पैसे मांगे गए। मदन साह ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कथित रूप से 2 करोड़ 70 लाख रुपये देने से मना किया, तो उनका टिकट काट दिया गया और वह सीट किसी और को दे दी गई। उन्होंने कहा, “लालू जी हमारे गार्जियन हैं, गरीबों के मसीहा हैं। 2020 में उन्होंने मुझ पर भरोसा जताया था, तब मैंने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन इस बार मुझे पैसे न देने की सजा मिली है।”

मदन साह ने आगे कहा कि संतोष कुशवाहा ने पहले भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने दावा किया कि “2020 में जब उन्हें टिकट नहीं मिला, तब उन्होंने हमारे खिलाफ काम किया। अब उन्हीं को टिकट दे दिया गया।”

राबड़ी आवास के बाहर मदन साह लगातार लालू प्रसाद यादव से मिलने की मांग करते रहे। उनका कहना था कि अब पार्टी में फैसले पारिवारिक स्तर पर लिए जा रहे हैं और कार्यकर्ताओं की आवाज़ को अनसुना किया जा रहा है। वे बोले, “लालू जी जब तक पार्टी के फैसले लेते थे, तब तक यह गरीबों की पार्टी थी। अब तो सब कुछ बदल गया है।”

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद लोगों ने बताया कि मदन साह की तबीयत बिगड़ने की आशंका के कारण उनके परिजन उन्हें कई बार हटाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वह लगातार फूट-फूट कर रोते रहे।