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Up Kiran, Digital Desk: नया स्मार्टफोन हर किसी की ख्वाहिश है, मगर बार-बार नया फोन लेना जेब पर भारी पड़ सकता है। यही कारण है कि आजकल सेकेंड हैंड और रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन्स का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हों या स्थानीय मोबाइल बाज़ार, हर जगह सस्ते दामों में फ्लैगशिप फोन का लालच दिया जाता है। हालांकि, अगर सस्ता फोन बाद में परेशानी का कारण बने, तो यह सौदा घाटे का साबित हो सकता है। इसीलिए सेकेंड हैंड या रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को समझना जरूरी है।

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पहले फोन की कानूनी पहचान को लेकर सतर्क रहना चाहिए। भारत में प्रत्येक मोबाइल फोन का एक यूनिक IMEI नंबर होता है, जिससे यह पता चलता है कि फोन चोरी का तो नहीं है। अगर फोन चोरी का हो और आपने उसे खरीद लिया, तो पुलिस आप तक पहुंच सकती है।

सरकार और टेलीकॉम नियामक की गाइडलाइंस के अनुसार, चोरी या ब्लैकलिस्टेड IMEI वाला फोन कभी भी नेटवर्क से ब्लॉक हो सकता है। इसीलिए IMEI नंबर को CEIR पोर्टल या नेटवर्क ऑपरेटर से जांचना बहुत जरूरी है। यदि IMEI से संबंधित कोई गड़बड़ी हो, तो ऐसे फोन से दूर रहना अच्छा रहेगा।

भौतिक स्थिति

इसके बाद आता है फोन की भौतिक स्थिति। स्क्रीन पर हल्की खरोंच सामान्य हो सकती है, मगर अगर डिस्प्ले में शैडो, लाइन, टच लैग या रंग का फैलाव जैसी समस्या हो, तो यह एक बड़ा चेतावनी संकेत है।

फोन के शरीर में डेंट, मुड़ा हुआ फ्रेम या ढीले बटन यह दर्शा सकते हैं कि फोन गिर चुका है या अत्यधिक उपयोग में था। कैमरा लेंस, स्पीकर ग्रिल और चार्जिंग पोर्ट की भी अच्छी तरह से जांच करनी चाहिए, क्योंकि यहीं से नमी और धूल अंदर घुस सकती है।

बैटरी की स्थिति

आजकल के स्मार्टफोन में बैटरी की स्थिति सबसे अहम पहलू बन चुकी है। सेकेंड हैंड फोन में बैटरी अक्सर पहले कमजोर होती है। यदि बैटरी जल्दी खत्म हो रही हो, फोन ज्यादा गर्म हो रहा हो, या चार्ज बहुत धीरे हो रहा हो, तो बाद में बैटरी रिप्लेसमेंट का खर्चा आ सकता है। कुछ ब्रांड बैटरी की स्थिति सेटिंग्स में दिखाते हैं, जबकि अन्य मामलों में सर्विस सेंटर या थर्ड-पार्टी ऐप से इसे चेक करना होता है।

सिर्फ हार्डवेयर नहीं, सॉफ़्टवेयर और सुरक्षा भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
फोन में किसी और का Google या Apple अकाउंट पहले से लॉगिन न हो, यह जांचना जरूरी है।

अगर फैक्ट्री रीसेट के बाद भी पुराना अकाउंट मांगता है, तो इसका मतलब है कि फोन ठीक से अनलिंक नहीं हुआ है। ऐसे फोन भविष्य में लॉक हो सकते हैं। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि फोन को अभी भी सुरक्षा अपडेट मिल रहे हैं या नहीं, क्योंकि पुराने और असमर्थित फोन साइबर अपराध और डेटा चोरी के लिए ज्यादा जोखिमपूर्ण होते हैं।

रिफर्बिश्ड का अर्थ

रिफर्बिश्ड फोन खरीदते समय यह समझना जरूरी है कि 'रिफर्बिश्ड' का मतलब हर जगह समान नहीं होता। कुछ प्लेटफार्म फोन को अच्छे से टेस्ट करके, खराब पार्ट्स बदलकर और गुणवत्ता जांचने के बाद बेचते हैं, जबकि कुछ जगह केवल सफाई करके फोन को रिफर्बिश्ड बता देते हैं।

इसलिए वारंटी और रिटर्न पॉलिसी को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि कम से कम 6 महीने की वारंटी दी जा रही हो, तो जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

एक और महत्वपूर्ण पहलू है फोन का नेटवर्क और हार्डवेयर टेस्ट। कॉलिंग, माइक्रोफ़ोन, स्पीकर, Wi-Fi, Bluetooth, GPS और फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक जैसे फीचर्स का तुरंत परीक्षण करना चाहिए। कई बार फोन दिखने में ठीक लगता है, लेकिन अंदर से सेंसर या नेटवर्क मॉड्यूल में समस्याएँ हो सकती हैं, जो बाद में सामने आती हैं।

कीमत पर ध्यान दें

कीमत के मामले में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अगर कोई फोन मार्केट रेट से बहुत सस्ता मिल रहा हो, तो उसके पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, सेकेंड हैंड फोन की कीमत उसकी स्थिति, उम्र और ब्रांड सपोर्ट के हिसाब से निर्धारित होनी चाहिए। बिना बिल, बॉक्स और एक्सेसरीज़ वाले फोन सस्ते जरूर हो सकते हैं, लेकिन उनका जोखिम भी उतना ही अधिक होता है।