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Up Kiran,Digital Desk: उत्तर प्रदेश में वर्षों से चल रहा प्रशासनिक विवाद अब लगभग समाप्ति की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। विकास प्राधिकरण और जिला पंचायतों के बीच भवन मानचित्र स्वीकृति को लेकर उत्पन्न भ्रम और विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने दोनों विभागों के अधिकारियों से विस्तृत चर्चा के बाद आदेश दिया कि भवन मानचित्र की स्वीकृति की प्रक्रिया को पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाए।

विवाद की जड़ क्या थी?

विकास प्राधिकरण अधिनियम के तहत नगरीय क्षेत्र के बाहर स्थित विकास क्षेत्रों में किसी भी निर्माण कार्य के लिए संबंधित विकास प्राधिकरण से मानचित्र की स्वीकृति अनिवार्य होती है। लेकिन कई बार जिला पंचायतों ने अपनी स्थिति का उपयोग कर बिना विकास प्राधिकरण की मंजूरी के निर्माण स्वीकृति दे दी। जब विकास प्राधिकरण ने इन मामलों को अवैध ठहराया और कार्रवाई शुरू की, तो इससे नागरिकों, आवंटियों और बिल्डरों में असंतोष पैदा हुआ, जिसके परिणामस्वरूप विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई।

मुख्यमंत्री का साफ संदेश: भ्रष्टाचार और दोहरे अधिकार की स्थिति खत्म होगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों विभागों की दलीलें सुनने के बाद यह स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे किसी भी विभाग की कार्रवाई में भ्रम या दोहरा अधिकार न हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो राज्य सरकार कानून में बदलाव करने से पीछे नहीं हटेगी, ताकि व्यवस्था और अधिक सुसंगत और प्रभावी हो सके। इस कदम से प्रशासनिक टकराव और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

पुराने निर्माणों को राहत मिलने की संभावना

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि जिन निर्माणों को पुराने नियमों के तहत अनुमोदन प्राप्त था, उन्हें परेशानी में नहीं डाला जाएगा। यदि निर्माण तय बायलॉज के अनुसार हैं, तो उन्हें संरक्षित किया जाएगा और नागरिकों को किसी प्रकार का आर्थिक या कानूनी नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

छोटे शहरों में शहरी नियोजन की दिशा में सुधार

मुख्यमंत्री ने विवाद के समाधान से आगे बढ़ते हुए प्रदेश के शहरी विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के लिए मास्टर प्लान बनाने का निर्देश दिया है। यह कदम छोटे शहरों में सुनियोजित विकास को बढ़ावा देगा और शहरीकरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित करेगा।