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Up kiran,Digital Desk : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले, भाजपा 'असम मॉडल' का सहारा लेकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा द्वारा घुसपैठियों के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई, बंगाल में भी चुनावी लाभ दिला सकती है।

ममता बनर्जी और SIR विवाद

ममता बनर्जी एसआईआर (Special Identity Register) को लेकर चुनाव से पहले आक्रामक रुख अपना रही हैं। वे इसे आम बांग्लाभाषी जनता के खिलाफ बताते हुए खुद को बांग्लाभाषी और बांग्ला अस्मिता की रक्षक के रूप में पेश कर रही हैं। भाजपा का लक्ष्य है कि इस कार्ड को कमजोर कर पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन को आसान बनाया जाए।

भाजपा का रणनीति

भाजपा लगातार यह संदेश दे रही है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण बंगाल में आम लोगों के रोजगार और सुरक्षा पर खतरा है। पार्टी का दावा है कि राज्य में अपराधों में भी घुसपैठियों की बड़ी भागीदारी है। लव जिहाद और लैंड जिहाद के जरिए आम जनता के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है। भाजपा एसआईआर को इन कमियों का समाधान मानती है, जबकि ममता बनर्जी का विरोध उनकी छवि को घुसपैठियों के पक्षधर के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

असम मॉडल का असर

पश्चिम बंगाल में 'असम मॉडल' चर्चा में है। असम में हेमंत सरमा के कड़े कदमों से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है और वे चुनाव जीतने के बाद बंगाल में भी घुसपैठियों को बाहर निकालने की योजना पर चर्चा कर रहे हैं। यह मुद्दा खासकर युवाओं के बीच काफी चर्चा का विषय बन चुका है।

ममता बनर्जी की रणनीति पर BJP का दावा

केंद्रीय राज्य शिक्षा मंत्री सुकांत मजूमदार और भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा का कहना है कि ममता बनर्जी एसआईआर का विरोध केवल घुसपैठियों को बचाने और टीएमसी वोट बैंक बनाए रखने के लिए कर रही हैं। उनका तर्क है कि बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है और संवैधानिक संस्थाओं के कार्यों में हस्तक्षेप उनकी कोशिशों को सफल नहीं होने देगा।