Up kiran,Digital Desk : दिल्ली-एनसीआर की तेज़ रफ्तार जिंदगी में सफर हमेशा चुनौती रहा है। केंद्रीय बजट 2026-27 ने इस चुनौती का आंशिक समाधान पेश किया है। बजट में राजधानी क्षेत्र की परिवहन रीढ़ मानी जा रही मेट्रो को खुलकर समर्थन दिया गया है, जबकि महत्वाकांक्षी नमो भारत (आरआरटीएस) परियोजना के लिए अपेक्षाकृत कम प्रावधान किए गए हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी का मुख्य भार मेट्रो नेटवर्क पर ही रहेगा।
मेट्रो को मिली भारी-भरकम डोज
केंद्रीय बजट 2026-27 में देशभर की मेट्रो परियोजनाओं के लिए 28,740 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा लाभ दिल्ली-एनसीआर को मिलने की उम्मीद है। सरकार का फोकस मेट्रो नेटवर्क के विस्तार, इंटरचेंज क्षमता बढ़ाने और नई लाइनों को तेजी से पूरा करने पर नजर आ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी और सड़क पर वाहनों का दबाव घटेगा।
फेज-5 की ओर कदम बढ़ाएगी दिल्ली मेट्रो
डीएमआरसी दिल्ली मेट्रो के फेज-5 की तैयारी में जुट गई है। इस चरण में तेजी से विकसित हो रहे बाहरी इलाकों और नए शहरी केंद्रों को मेट्रो से जोड़ने पर जोर रहेगा। प्रस्तावित कॉरिडोरों में लाजपत नगर–साकेत जी ब्लॉक, इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ, आरके आश्रम–जनकपुरी पश्चिम और द्वारका–नजफगढ़ जैसे रूट शामिल हैं। साथ ही कुछ मौजूदा लाइनों के विस्तार और इंटरचेंज को मजबूत करने की योजना है, जिससे शहर के भीतर और एनसीआर से आने-जाने का समय कम हो सके।
नोएडा मेट्रो के नए रूट को हरी झंडी के संकेत
मेट्रो के लिए बड़े बजटीय प्रावधान से नोएडा मेट्रो के दो प्रस्तावित नए रूट की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं। सेक्टर-51 से नॉलेज पार्क-5 और सेक्टर-142 से बोटेनिकल गार्डेन तक के रूट की डीपीआर को लेकर लंबे समय से मंजूरी का इंतजार था। बोटेनिकल गार्डेन रूट को पीआईबी से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि ग्रेनो वेस्ट मेट्रो रूट भी मंजूरी के अंतिम चरण में है। दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 5,245 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
नमो भारत की फंडिंग घटी, रफ्तार पर सवाल
बजट 2026-27 में नमो भारत (आरआरटीएस) परियोजना के लिए 2,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 25 प्रतिशत कम है। 2025-26 में इस परियोजना को 2,918 करोड़ रुपये और उससे पहले 3,855 करोड़ रुपये मिले थे। कम बजट का सीधा असर परियोजनाओं की गति पर पड़ सकता है, हालांकि सरकार का कहना है कि दीर्घकालिक फोकस अब भी आरआरटीएस नेटवर्क के विस्तार पर बना हुआ है।
55 किलोमीटर ट्रैक पर दौड़ रही नमो भारत
एनसीआरटीसी के तहत फेज-एक में तीन प्रमुख कॉरिडोर की योजना है, जिनमें दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ, दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी शामिल हैं। फिलहाल दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर का 55 किलोमीटर हिस्सा चालू हो चुका है, जो नई अशोक नगर से मेरठ साउथ तक संचालित है। आने वाले वर्षों में कई नए कॉरिडोर भी पाइपलाइन में हैं।
मेट्रो और आरआरटीएस का संतुलन ही भविष्य की कुंजी
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो और आरआरटीएस के संयुक्त विकास से ही दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या पर काबू पाया जा सकता है। हालांकि बजट में आरआरटीएस की फंडिंग घटने से यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि कम संसाधनों में परियोजनाओं की रफ्तार कैसे बनी रहेगी।
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