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UP Kiran,Digital Desk: बिहार सरकार ने राज्य में लंबित भूमि सर्वे कार्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत, सभी शेष बचे भूमि सर्वे को अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके बाद, किसानों और भूमि मालिकों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का सही तरीके से लाभ मिल सकेगा।

लंबित भूमि सर्वे का समाधान

राजस्व और भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा में इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य की लगभग 20 प्रतिशत भूमि का अभी तक सर्वे नहीं हो पाया है। इसकी वजह से कई सरकारी योजनाओं का लाभ गरीब और छोटे किसानों तक नहीं पहुँच पा रहा है। इसके अलावा, भूमि खरीद-बिक्री में भी समस्याएँ आ रही हैं। भूमि सर्वे का कार्य 2012 में शुरू हुआ था और 2019 में इसमें कुछ बदलाव किए गए थे। अब इसे एक मिशन मोड में पूरा करने की योजना है।

समाज पर असर और विवादों का समाधान

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भूमि से जुड़े विवाद सिर्फ प्रशासनिक समस्याएँ नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक तनाव का कारण भी बन सकते हैं। उन्होंने इसे "भूमि की बीमारी" के रूप में वर्णित किया। राज्य सरकार इस समस्या को हल करने के लिए 'भूमि सुधार जनकल्याण संवाद' कार्यक्रम चला रही है, जिसके तहत भूमि विवादों का समाधान पारदर्शी और तेज़ तरीके से किया जा रहा है। अब तक, 8363 शिकायतों में से 2414 मामले सुलझाए जा चुके हैं, और इस पहल को विधानसभा में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

प्राथमिकता पर निपटाए जाएंगे परिमार्जन आवेदन

राजस्व महा-अभियान के दौरान करीब 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 40 लाख आवेदन भूमि के नाम, खाता और खेसरा संबंधी सुधारों से जुड़े हैं। राज्य सरकार इन परिमार्जन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की योजना बना रही है ताकि भूमि मालिकों को योजनाओं का लाभ मिल सके और वे समय पर अपनी भूमि का सत्यापन करवा सकें।

जमीन विवादों का त्वरित समाधान

राज्य सरकार ने जटिल भूमि विवादों को हल करने के लिए अंचलवार रजिस्ट्रेशन काउंटर खोलने की योजना बनाई है। इस पहल से आम नागरिकों की शिकायतें सीधे प्रशासन तक पहुँच रही हैं, जिससे विवादों का समाधान जल्द और पारदर्शी तरीके से हो रहा है। इस पहल से राज्य में भूमि विवादों को कम करने में मदद मिलेगी और समाज में स्थिरता आएगी।