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Up kiran,Digital Desk : केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को नई राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला (NSEL) का उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) परिसर में स्थापित की गई है और वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों की जांच और अंशांकन के लिए अत्याधुनिक सुविधा प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुनिया में गिनी-चुनी ऐसी प्रयोगशालाओं में से एक है।

डॉ. सिंह ने कहा कि यह कदम भारत की पर्यावरणीय निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अब देश को प्रदूषण निगरानी उपकरणों के प्रमाणन के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसका लाभ न केवल विदेशी मुद्रा की बचत में होगा बल्कि परीक्षण की प्रक्रिया तेज होगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

सोलर ऊर्जा क्षेत्र को भी मिला नया मंच

साथ ही मंत्री ने राष्ट्रीय प्राथमिक मानक सौर सेल अंशांकन सुविधा (National Primary Standard Facility for Solar Cell Calibration) का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार सुविधा बताया। इसके जरिए भारत अब वैश्विक स्तर पर फोटोवोल्टिक माप और सौर मेट्रोलॉजी के मानक तय करने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

80वें स्थापना दिवस पर विशेष संबोधन

CSIR-NPL के 80वें स्थापना दिवस पर डॉ. सिंह ने कहा कि नई प्रयोगशाला और प्राथमिक सौर मानक सुविधा दोनों ही भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका देने वाली हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत की जलवायु के अनुसार सटीक और भरोसेमंद वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों का अंशांकन लंबे समय से आवश्यक था। अब इससे पारदर्शी और प्रमाणिक पर्यावरणीय डेटा उपलब्ध होगा, जो नीति निर्माण और क्रियान्वयन में मददगार साबित होगा।

उद्योगों, नियामक संस्थाओं और स्टार्टअप्स को फायदा

नई प्रयोगशाला से उद्योगों, नियामक निकायों और स्टार्टअप्स को सीधे लाभ मिलेगा। उपकरणों का परीक्षण भारतीय जलवायु परिस्थितियों में किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जैसे अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ेगी। पर्यावरण मंत्रालय ने CSIR-NPL को देश में उत्सर्जन और वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों के सत्यापन और प्रमाणन की आधिकारिक एजेंसी घोषित किया है।

किन उपकरणों की होगी जांच

राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला में मुख्य रूप से निम्न उपकरणों की जांच होगी:

ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS)

कंटीन्यूअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS)

इन उपकरणों की जांच और प्रमाणन से देश में विश्वसनीय वायु गुणवत्ता डेटा उपलब्ध होगा, जो नीति निर्धारण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।