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UP Kiran,Digital Desk: यूएसए प्रेसिडेंट ट्रंप ने गाजा में शांति और पुनर्निर्माण के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल के तहत, एक नई ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य गाजा में युद्ध के बाद शांति स्थापना और विकास कार्यों को फिर से शुरू करना है। ट्रंप की तरफ से यह फैसला 19 फरवरी को होने वाली पहली बैठक के लिए लिया गया है। इस मीटिंग में कई देशों के नेता और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।

पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका

एक बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप ने पाकिस्तान और तुर्की को इस बोर्ड का हिस्सा क्यों बनाया। दोनों देश खासकर तुर्की, फिलिस्तीन के मामले में इजरायल के खिलाफ खुलकर बोलते आए हैं। इजरायल की चिंता यही है कि इन दोनों देशों की मौजूदगी से गाजा पर हो रही चर्चाओं में कोई ऐसा फैसला न लिया जाए, जो इजरायल के लिए अनुकूल न हो। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और तुर्की के नेतृत्व के साथ यह वार्ता इजरायल के लिए बेहद संवेदनशील बन सकती है।

इजरायल के लिए संभावित खतरे

इजरायल ने हमेशा पाकिस्तान को अपने मसले से अलग रखने की कोशिश की है। ऐसे में, यदि शहबाज शरीफ गाजा पुनर्निर्माण प्रक्रिया में शामिल होते हैं, तो यह इजरायल के लिए नई चुनौती पेश कर सकता है। इजरायल का कहना है कि पाकिस्तान का इस मुद्दे में शामिल होना उसकी नीतियों के खिलाफ है। इसके अलावा, मुसलमान देशों का एकजुट होकर कोई कड़ा स्टैंड लेने का जोखिम इजरायल को परेशान कर रहा है, विशेष रूप से अगर सीजफायर के उल्लंघन को लेकर कोई सख्त शर्तें लागू की जाती हैं।

शांति प्रक्रिया में 22 देशों की भागीदारी

अमेरिका ने इस बोर्ड ऑफ पीस के लिए 22 देशों को आमंत्रित किया है, जिनमें सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, और यूएई जैसे प्रमुख मुस्लिम देश शामिल हैं। इस प्रयास से उम्मीद की जा रही है कि गाजा में शांति स्थापना और पुनर्निर्माण को गति मिलेगी। मगर, इन देशों के एकजुट होने से इजरायल को यह डर है कि इसके चलते उस पर अधिक दबाव डाला जा सकता है, खासकर से गाजा में उसके सैन्य आक्रमणों को लेकर।

भारत की चुप्पी

भारत ने इस पहल पर अभी तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। माना जा रहा है कि भारत यह देख रहा है कि इस बोर्ड की प्रक्रिया भविष्य में संयुक्त राष्ट्र संघ के विकल्प के तौर पर तो नहीं उभर रही। भारत का मानना है कि इस समय कुछ अधिक सक्रियता दिखाने से स्थिति और जटिल हो सकती है, खासकर जब अमेरिका की भूमिका और प्रभाव इस क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है।