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Up kiran,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच बड़ा कूटनीतिक संकेत सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा है कि राष्ट्रपति Donald Trump की प्राथमिकता ईरान के साथ समझौता करना है और यदि जरूरत पड़ी तो वे ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei से मिलने के लिए भी तैयार हैं।

‘संवाद जरूरी, सहमति बाद में’—रुबियो

एक इंटरव्यू में रुबियो ने साफ कहा कि राष्ट्रों के बीच बातचीत जरूरी है, चाहे मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों। उनके मुताबिक, ट्रंप ऐसे नेता हैं जो समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए किसी से भी मिलने को तैयार रहते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुलाकात का अर्थ तत्काल सहमति नहीं होता, बल्कि जटिल मुद्दों के समाधान की कोशिश होता है।

मध्य पूर्व में सैन्य संदेश

रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े सवाल पर रुबियो ने दावा किया कि रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के युद्ध लक्ष्य बदल चुके हैं और वे डोनेत्स्क क्षेत्र के उस हिस्से पर नियंत्रण चाहते हैं जो अभी उनके कब्जे में नहीं है।
वहीं, ट्रंप प्रशासन द्वारा मध्य पूर्व में दूसरा विमानवाहक पोत भेजने के फैसले को उन्होंने एक रणनीतिक कदम बताया। उनके अनुसार, अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान किसी बड़े टकराव की स्थिति न बनाए।

यूरोप को भी दिया संदेश

रुबियो ने ट्रांसअटलांटिक रिश्तों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप साझा सभ्यता और मूल्यों से जुड़े हैं, इसलिए सहयोग मजबूत होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गठबंधन तभी प्रभावी होगा जब सहयोगी देश अपनी सुरक्षा और मूल्यों की रक्षा के लिए सक्षम हों।

हाल के दिनों में जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने भी यूरोप को अपनी सुरक्षा संरचना मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया था। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने ट्रांसअटलांटिक संवाद में संतुलन की आवश्यकता बताई, जबकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने यूरोप को सुरक्षा मामलों में आत्मसंतोष से बचने की सलाह दी।

क्या फिर शुरू होगी परमाणु वार्ता?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप और खामेनेई के बीच सीधी मुलाकात होती है, तो यह परमाणु समझौते और क्षेत्रीय सुरक्षा पर नए सिरे से वार्ता की शुरुआत का संकेत हो सकता है। हालांकि, ईरान-अमेरिका संबंधों में अविश्वास की गहरी खाई अब भी बनी हुई है।