
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम को अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुंचे। यहां तेज बारिश के बावजूद प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। खास बात यह रही कि श्रीलंका के पांच प्रमुख मंत्रियों ने खुद एयरपोर्ट पहुंचकर पीएम मोदी का स्वागत किया, जो भारत और श्रीलंका के बीच गहरे संबंधों को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद सीधे श्रीलंका पहुंचे।
भारत और श्रीलंका के बीच 10 अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति की उम्मीद
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की उम्मीद है। भारत और श्रीलंका के बीच कुल लगभग 10 ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें सहयोग को नई दिशा दी जा सकती है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब श्रीलंका तीन साल पुराने आर्थिक संकट से धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है। इस संकट के दौरान भारत ने श्रीलंका को 4.5 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता दी थी, जिसने इस द्वीपीय देश को स्थिरता की ओर बढ़ने में मदद की।
संयुक्त दृष्टिकोण की समीक्षा और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर
श्रीलंका रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच ‘साझा भविष्य के लिए साझेदारी’ के दृष्टिकोण की समीक्षा और उसे आगे बढ़ाने का मौका होगी। इस दृष्टिकोण की नींव तीन महीने पहले रखी गई थी, जब श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भारत का दौरा किया था। अब दोनों नेताओं के बीच कोलंबो में होने वाली बातचीत में इस दिशा में ठोस निर्णयों की संभावना है।
एयरपोर्ट पर हुआ प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक स्वागत
श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में पीएम मोदी का स्वागत एक ऐतिहासिक और उच्चस्तरीय रहा। देर रात 9 बजे बारिश के बीच पांच प्रमुख श्रीलंकाई मंत्री हवाई अड्डे पर मौजूद रहे। इनमें विजिता हेराथ (विदेश, विदेशी रोजगार और पर्यटन मंत्री), डॉ. नलिंदा जयतिसा (स्वास्थ्य और मास मीडिया मंत्री), डॉ. अनिल जयंता (श्रम मंत्री), रामलिंगम चंद्रशेखर (मत्स्य पालन मंत्री), सरोजा सावित्री पॉलराज (महिला और बाल कल्याण मंत्री) और डॉ. क्रिसंथा अबेसेना (विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री) शामिल थे। इन सभी मंत्रियों की उपस्थिति दर्शाती है कि श्रीलंका भारत के साथ संबंधों को कितनी प्राथमिकता दे रहा है।
श्रीलंका के लिए भारत की भूमिका निर्णायक
पिछले वर्षों में भारत ने श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को केवल कूटनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संकट के समय मददगार की भूमिका भी निभाई। जब श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब भारत ने न केवल वित्तीय सहायता दी, बल्कि खाद्य पदार्थों, दवाओं और ईंधन की आपूर्ति भी सुनिश्चित की। इस सहयोग के चलते श्रीलंका में भारत के प्रति सकारात्मक भावनाएं मजबूत हुई हैं।
आगे क्या उम्मीदें हैं इस यात्रा से?
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच जो वार्ता होगी, उससे भविष्य की साझेदारी की नई रूपरेखा सामने आ सकती है। भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और श्रीलंका के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध इस बातचीत को विशेष बनाते हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, पर्यटन और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण समझौतों की संभावना है।
इस यात्रा से यह स्पष्ट है कि भारत और श्रीलंका अपने संबंधों को केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि व्यवहारिक और जनहित पर आधारित मजबूत साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
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