Up kiran,Digital Desk : अपनी दमदार अदाकारी और अलग-अलग तरह के किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता संजय मिश्रा इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘वध 2’ को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में टाइपकास्ट होने के अनुभव पर खुलकर बात की और बताया कि आखिर किस तरह के रोल उन्हें चिढ़चिड़ा कर देते हैं। अभिनेता का कहना है कि लंबे समय तक एक ही छवि में बंधकर रह जाना कलाकार के लिए आसान नहीं होता।
टाइपकास्टिंग पर क्या बोले संजय मिश्रा
एक इंटरव्यू के दौरान संजय मिश्रा ने स्वीकार किया कि इंडस्ट्री में अक्सर कलाकारों को उनके पिछले काम के आधार पर ही रोल ऑफर किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर निर्माता उन्हें कॉमेडी किरदारों में ही देखना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक, प्रोड्यूसर्स को लगता है कि अगर फिल्म में हास्य का रोल है तो संजय मिश्रा उसे एक ही टेक में निभा देंगे, इसलिए उन्हें उसी तरह के किरदार के लिए बुलाया जाता है।
बार-बार वही रोल मिलने पर आती है नाराजगी
अभिनेता ने साफ तौर पर कहा कि एक जैसे रोल लगातार मिलने पर उन्हें गुस्सा आता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि संघर्ष के दिनों में जब उनके पास ज्यादा काम नहीं था, तब ऐसे रोल भी उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं थे। संजय मिश्रा के अनुसार, काम मिलना हमेशा खुशी की बात होती है, लेकिन कलाकार के भीतर कुछ नया करने की इच्छा भी बनी रहती है।
दमदार फिल्मों से बनाई अलग पहचान
संजय मिश्रा ने अपने करियर की शुरुआत 1995 में फिल्म ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया!’ से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘आंखों देखी’, ‘मसान’, ‘कामयाब’ और ‘कड़वी हवा’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीता। इन फिल्मों में उन्होंने यह साबित किया कि वह सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गंभीर और संवेदनशील किरदारों में भी उतने ही असरदार हैं।
‘वध 2’ में फिर दिखेगा अलग अंदाज
संजय मिश्रा जल्द ही नीना गुप्ता के साथ फिल्म ‘वध 2’ में नजर आने वाले हैं। फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है और इसे ‘वध’ का स्पिरिचुअल सीक्वल बताया जा रहा है। इस फिल्म में कुमुद मिश्रा, अक्षय डोगरा, शिल्पा शुक्ला और योगिता बिहानी जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन और लेखन जसपाल सिंह संधू ने किया है।
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