Up kiran,Digital Desk : केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोना चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य के.पी. शंकर दास की याचिका खारिज करते हुए तीखी टिप्पणी की। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि आपने भगवान को भी नहीं छोड़ा।
यह मामला सबरीमाला मंदिर में द्वारपालक देवताओं की मूर्तियों और श्रीकोविल के दरवाजों से सोना चोरी होने से जुड़ा है। के.पी. शंकर दास ने सुप्रीम कोर्ट से केरल हाईकोर्ट की उन टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी, जिनमें कहा गया था कि वह और के. विजयकुमार इस मामले में आपराधिक साजिश के आरोपों से खुद को अलग नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को ठुकरा दिया।
जिम्मेदारी से नहीं बच सकते
जस्टिस दिपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि देवस्वोम बोर्ड के सदस्य के रूप में शंकर दास की भी जवाबदेही तय होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हुई चोरी के मामले में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
अब तक 10 गिरफ्तार
इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) अब तक दो पूर्व देवस्वोम बोर्ड अध्यक्षों समेत कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुका है। केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर एसआईटी को हाल ही में जांच पूरी करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय भी दिया गया है।
राजनीति भी गरमाई
सबरीमाला सोना चोरी केस को लेकर केरल की राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने मुख्यमंत्री कार्यालय पर आरोप लगाया है कि एसआईटी पर जांच धीमी करने का दबाव बनाया जा रहा है। विपक्ष का दावा है कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले सरकार राजनीतिक नुकसान से बचने की कोशिश कर रही है।
वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ
एसआईटी ने हाल ही में पूर्व देवस्वोम मंत्री और वरिष्ठ सीपीआई(एम) विधायक कड़कमपल्ली सुरेंद्रन से भी पूछताछ की है। इसके अलावा पूर्व देवस्वोम बोर्ड अध्यक्ष पी.एस. प्रसांत से भी सवाल-जवाब किए गए। विपक्ष का आरोप है कि सुरेंद्रन से हुई पूछताछ को सरकार के दबाव में गोपनीय रखा गया।
सबरीमाला जैसे आस्था के बड़े केंद्र से जुड़ा यह मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और नैतिक बहस का विषय भी बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने इस पूरे मामले को एक नई दिशा दे दी है।

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