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Up Kiran,Digital Desk: नीतीश सरकार ने एक महत्वपूर्ण और मानवीय निर्णय लिया है जो राज्य के सरकारी अस्पतालों में मृत्यु के बाद शवों के परिवहन को लेकर होगा। अब सरकार के निर्देशों के तहत, विशेष रूप से राशन कार्डधारक परिवारों, दुर्घटना में मृत व्यक्तियों और पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम के लिए लाए गए शवों के लिए मुफ्त शव वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। ये कदम मृतकों के परिजनों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो अक्सर शव के परिवहन में मुश्किलों का सामना करते हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कड़ा आदेश: शव वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी

स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के अधीक्षकों, सिविल सर्जनों, और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि यदि अस्पतालों में शव वाहन उपलब्ध नहीं है या वह खराब हैं, तो ऐसे मामलों में वैकल्पिक एंबुलेंस या किराए पर वाहन की व्यवस्था करनी होगी। इससे मृतक के परिजनों को शव को सुरक्षित और सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाने में कोई कठिनाई नहीं होगी।

शव का उचित तरीके से ट्रांसपोर्टेशन जरूरी

सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश दिए हैं कि पोस्टमार्टम के दौरान शव को स्ट्रेचर, ट्रॉली या शव वाहन से सुरक्षित तरीके से पोस्टमार्टम कक्ष तक ले जाया जाए। इसके अलावा, शव को हमेशा सफेद चादर से ढककर रखा जाएगा, ताकि मृतक के सम्मान को कोई ठेस न पहुंचे।

कड़ी कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन नहीं सहन होगा

यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करता है तो उस पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी और निलंबन जैसी सख्त सजा दी जा सकती है। यह कदम प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने और मरीजों के परिजनों को सम्मानपूर्ण सेवा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सांसारिक लागतें और वित्तीय व्यवस्था

बिहार सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी अस्पताल में शव वाहन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो मृतक के परिवहन पर 2,000 रुपये तक खर्च किया जा सकता है। यह खर्च रोगी कल्याण समिति द्वारा भुगतान करेगी। यदि समिति के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है, तो राज्य स्वास्थ्य समिति से बाद में समायोजन कर लिया जाएगा।

दूरदराज इलाकों में शव वाहन सेवा: नोडल अधिकारी की नियुक्ति

राज्य सरकार ने दूरदराज के क्षेत्रों में शव के परिवहन को लेकर भी विशेष प्रबंध किए हैं। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो 102 एंबुलेंस सेवा के माध्यम से शवों को सम्मानपूर्वक मृतक के घर या श्मशान घाट तक पहुंचाने का काम करेंगे। इससे ग्रामीण इलाकों में भी मृतकों के परिजनों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।