
Donald Trump on ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति का एक दांव और वैश्विक बाज़ार में हलचल मच गई। मॉस्को और कीव के बीच एक महीने का युद्धविराम कराने में सफलता ने न सिर्फ जियो-पॉलिटिकल तनाव को थामने का संकेत दिया, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों को भी मिट्टी के भाव तक ला दिया। रूस से तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड ऑयल की कीमतें 71 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। जानकारों का मानना है कि यह सिलसिला जारी रहा तो 70 डॉलर का आंकड़ा भी जल्द टूट सकता है। मगर सवाल यह है कि क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी इसका असर दिखेगा, या यह राहत सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगी?
रूस और यूक्रेन के बीच 30 दिनों के सीजफायर ने बाज़ार को नई उम्मीद दी है। मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेनी ऊर्जा सुविधाओं पर हमले रोकने की सहमति दी। तो वहीं ट्रंप की अपेक्षा के मुताबिक पूर्ण युद्धविराम को हरी झंडी नहीं मिली। फिर भी विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील का रास्ता खोल सकता है। दुनिया के शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक रूस का उत्पादन युद्ध शुरू होने के बाद से ठप-सा हो गया था। अब सप्लाई बढ़ने की संभावना से क्रूड ऑयल की कीमतों में और गिरावट की गुंजाइश बन रही है।
क्या भारत में गिरेंगी कीमतें
दुनिया भर में तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर अभी सन्नाटा छाया है। दिल्ली को छोड़कर कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में पेट्रोल 100 रुपये से ऊपर और डीजल 90 रुपए से ज्यादा बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ता क्रूड ऑयल ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए नुकसान की भरपाई का सुनहरा मौका है। बीते वर्ष मार्च में जब कंपनियों ने 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, तब उनके मुनाफे में 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी का अनुमान लगाया गया था। मगर इस बार कीमतें घटाने की कोई हलचल नहीं दिख रही।
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