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Up Kiran,Digital Desk: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत को अत्याधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 2026-27 के बजट में उन्होंने 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह योजना देश को चीन जैसे देशों से कम निर्भर बनाने और आगामी उद्योगों जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), रक्षा क्षेत्र और अक्षय ऊर्जा के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

क्या है रेयर अर्थ कॉरिडोर?
वित्त मंत्री ने कुछ प्रमुख खनिज समृद्ध राज्यों, जैसे ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इन खनिजों को निकालने और उनका उपयोग करने के लिए समर्पित कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की है। यह पहल 2025 में शुरू किए गए ₹7,280 करोड़ के 'रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट स्कीम' का विस्तार है।

इन राज्यों में स्थापित किए जा रहे कॉरिडोर सिर्फ खनिज खनन तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि एक पूरी प्रणाली के रूप में काम करेंगे। इसमें तटीय क्षेत्रों से दुर्लभ खनिजों का उत्खनन, उनका शुद्धीकरण और उन्हें परमानेंट मैग्नेट और अन्य उच्च तकनीकी उपकरणों में बदलने का काम किया जाएगा।

रेयर अर्थ कॉरिडोर के लिए राज्यों का चयन क्यों?
भारत में 'रेयर अर्थ' तत्वों का सबसे बड़ा भंडार समुद्र तटों पर ही पाया जाता है। ओडिशा और केरल के तटीय क्षेत्रों में मोनाजाइट और इल्मेनाइट जैसे खनिजों का भारी भंडार मौजूद है। इन क्षेत्रों में पहले से ही IREL (इंडिया) लिमिटेड जैसी प्रमुख कंपनियों और बंदरगाहों की उपस्थिति है, जो परिवहन और निर्यात को आसान बनाते हैं। वहीं, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और EV मैन्युफैक्चरिंग उद्योग काफी विकसित हैं, जिन्हें इन खनिजों की सबसे अधिक आवश्यकता है।