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Up kiran,Digital Desk : सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन केवल सोना-चांदी खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'अक्षय पुण्य' कमाने का भी महापर्व है। इस दिन किए गए दान का फल कभी समाप्त नहीं होता। शास्त्रों के अनुसार, अक्षय तृतीया पर जल से भरे घड़े या कलश का दान करना सबसे उत्तम माना गया है। वैशाख की भीषण गर्मी में प्यासे को जल पिलाना और पात्र का दान करना न केवल मानवता है, बल्कि यह पितृ दोष से मुक्ति का अचूक मार्ग भी है।

पितरों की तृप्ति का द्वार है 'धर्मघट' का दान

मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन मिट्टी के पात्र (घड़े) में जल भरकर दान करने से पितरों को परलोक में शीतलता प्राप्त होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन जलपूर्ण कुंभ का दान करता है, उसके पितरों को कभी प्यास नहीं लगती और वे प्रसन्न होकर वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इस दान को 'धर्मघट दान' भी कहा जाता है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप को समर्पित होता है।

घड़ा दान की सही विधि: ऐसे करें पूजा और अर्पण

अक्षय तृतीया (19 अप्रैल 2026) के दिन दान का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसे विधि-विधान से करना चाहिए:

स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर दान का संकल्प लें।

पात्र का चयन: मिट्टी, तांबे या पीतल का नया घड़ा लें और उसे शुद्ध जल से भरें।

सामग्री: जल में थोड़े काले तिल, अक्षत (चावल), पुष्प और चंदन डालें।

सजावट: घड़े के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसे लाल कपड़े या कलावा से बांधें। साथ ही घड़े के पास सामर्थ्य अनुसार फल, सत्तू या दक्षिणा रखें।

अर्पण: मंत्रोच्चार के साथ इस कलश को किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक दान करें।

दान के समय इस सिद्ध मंत्र का करें जाप

घड़ा दान करते समय निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करना अनिवार्य माना गया है, जिससे आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं:

'एष धर्मघटो दत्तो ब्रह्मविष्णुशिवात्मकः।

अस्य प्रदानात्सकला मम सन्तु मनोरथाः॥'

इसका अर्थ है—यह धर्मरूपी घड़ा ब्रह्मा, विष्णु और शिव का स्वरूप है। इसे दान करने से मेरे सभी मनोरथ (इच्छाएं) सिद्ध हों।

अक्षय फल: क्यों खास है इस बार का दान?

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अक्षय तृतीया पर जल दान करने से कुंडली में चंद्रमा और बुध ग्रह मजबूत होते हैं। इससे व्यक्ति को मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि इस दिन किया गया जल दान परलोक के कठिन मार्ग में अमृत के समान शीतलता प्रदान करता है। वर्ष 2026 में आयुष्मान योग के संयोग से यह दान दीर्घायु और आरोग्य के द्वार खोलता है।

घड़ा दान से मिलने वाले प्रमुख लाभ

पितृ दोष से मुक्ति: यह दान पूर्वजों को संतुष्ट कर घर के क्लेश और पितृ दोष को दूर करता है।

सुख-समृद्धि: घर में अन्न और धन के भंडार कभी खाली नहीं होते।

मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से किया गया यह दान अक्षय पुण्य देता है, जो इस लोक के बाद भी साथ रहता है।

ग्रह शांति: जल और मिट्टी का दान मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होता है।

अक्षय तृतीया के इस पावन अवसर पर दान के साथ-साथ मन में सात्विक विचार रखें और दूसरों की सहायता का संकल्प लें। यह न केवल आपके जीवन को खुशहाल बनाएगा, बल्कि समाज में भी सकारात्मकता का संचार करेगा।