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अयोध्या फैसले पर बोले AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी- रिजेक्ट कर देना चाहिए 5 एकड़ जमीन का ऑफर

अयोध्या। स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे चर्चित अयोध्या भूमि विवाद पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुनाया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें अयोध्या की यह विवादित भूमि रामलला विराजमान को दी गई है। वहीं सुन्नी वक्फ को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है।

हालांकि यह जमीन अयोध्या में ही किसी दूसरी जगह होगी। CJI रंजन गोगोई ने मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है। इसके लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने का वक्त दिया है।

अयोध्या पर फैसले के बाद AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘हिंदुस्तान की न्यायपालिका पर हमें अटूट भरोसा है। लेकिन मुसलमान अपने कानूनी हक के लिए लड़ रहे थे। मेरी समझ से हमें पांच एकड़ की जमीन का ऑफर रिजेक्ट कर देना चाहिए।’

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- ‘सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत है, देश की एकता व सद्भाव बनाए रखने में सभी सहयोग करें। उत्तर प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सद्भाव का वातावरण बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

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अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘अदालत का फैसला आ चुका है। हम सभी राम मंदिर निर्माण के पक्ष में हैं। इस फैसले से न सिर्फ मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होगा, बल्कि इस मामले पर हो रही राजनीति भी अब खत्म होगी।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।’

अयोध्या पर फैसला आने के बाद मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार इस मामले पर अपना फैसला सुना दिया। मैं कोर्ट के इस फैसले का सम्मान करता हूं। लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड ने फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। ज़फ़रयाब जिलानी बोले रिव्यू पिटीशन पर विचार करेंगे।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने राजनैतिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील इस मुकदमें की 40 दिन तक मैराथन सुनवाई करने के बाद गत 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

देश के संवेदनशील मामले में फैसला सुनाने से पहले सीजेआई रंजन गोगोई ने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की। यह फैसला सर्वसम्मति से हुआ है। यानी 5 जजों की बेंच ने एक मत से यह फैसला सुनाया। इस फैसले के मद्देनजर देशभर में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

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