भूलकर भी न खाएं ऐसे मेवे! दिल के मरीजों के लिए डॉक्टर की सख्त चेतावनी, तुरंत बदलें ये आदत!
दिल की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अक्सर अपने खान-पान में बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर तेल, घी और अधिक मसालों से दूर रहने की हिदायत के बीच मरीजों और उनके परिजनों के मन में सबसे बड़ा संशय सूखे मेवों को लेकर रहता है। लोग अक्सर उलझन में रहते हैं कि क्या हार्ट पेशेंट्स काजू और बादाम का सेवन कर सकते हैं या इनसे दूरी बनाए रखना ही बेहतर है। इस आम धारणा पर स्थिति साफ करते हुए फोर्टिस हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉ. हरनिश सिंह भाटिया ने स्पष्ट किया है कि दिल के मरीज सीमित मात्रा में इन दोनों नट्स का सेवन सुरक्षित रूप से कर सकते हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ के अनुसार, सही तरीके और सही मात्रा में खाए जाएं तो काजू और बादाम दिल की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मददगार साबित होते हैं। इन मेवों में पाए जाने वाले हेल्दी फैट्स, डाइटरी फाइबर, प्लांट प्रोटीन, विटामिन्स और जरूरी मिनरल्स दिल की धमनियों और मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। बादाम की बात करें तो इसमें प्रचुर मात्रा में मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स, फाइबर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट विटामिन E मौजूद होते हैं, जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (LDL) के स्तर को घटाने और धमनियों में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को रोकने का काम करते हैं। दूसरी तरफ काजू मैग्नीशियम, कॉपर और अनसैचुरेटेड फैट्स का बेहतरीन स्रोत है, जो ब्लड प्रेशर, मेटाबॉलिक हेल्थ और हार्ट रिदम को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में इनका सेवन दिल के दौरे और अन्य कार्डियोवैस्कुलर जोखिमों को कम करने में सहायक है।
मात्रा के संतुलन को लेकर डॉक्टर सलाह देते हैं कि दिल के मरीज दिनभर में कुल मिलाकर 20 से 30 ग्राम यानी लगभग एक छोटी मुट्ठी सूखे मेवों का ही सेवन करें। इस दैनिक हिस्से में सामान्यतः 5 से 6 भीगे या कच्चे बादाम और 3 से 4 सादे काजू शामिल करना सुरक्षित माना जाता है। हालांकि हर मरीज की शारीरिक सक्रियता, वजन, दैनिक कैलोरी जरूरत और मौजूदा मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर यह मात्रा थोड़ी भिन्न भी हो सकती है।
सेवन के दौरान कुछ बुनियादी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। दिल के मरीजों को हमेशा बिना नमक वाले, सादे, कच्चे या हल्के भुने हुए मेवे ही खाने चाहिए। बाजार में मिलने वाले डीप-फ्राइड, अत्यधिक नमकीन या चाशनी-मसाले की परत चढ़े नट्स धमनियों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं, इसलिए इनसे पूरी तरह बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि कोई मरीज पहले से किडनी से जुड़ी किसी बीमारी, शरीर में पोटैशियम की अधिकता या नट एलर्जी की समस्या से पीड़ित है, तो उसे अपनी डाइट में कोई भी बदलाव करने से पहले अपने विशेषज्ञ डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लेना चाहिए।