क्या सच में पेट्रोल में मिल रहा 30% से ज्यादा इथेनॉल, केंद्र सरकार की नई टेस्टिंग रिपोर्ट ने खोली दावों की पोल

क्या सच में पेट्रोल में मिल रहा 30% से ज्यादा इथेनॉल, केंद्र सरकार की नई टेस्टिंग रिपोर्ट ने खोली दावों की पोल

देशभर में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाले E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार के बीच सीधा टकराव सामने आ गया है। कर्नाटक के 56 नमूनों सहित 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुटाए गए 893 सैंपलों की सख्त जांच के बाद केंद्र सरकार ने E20 फ्यूल प्रोग्राम का जोरदार बचाव किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सभी जांचे गए सैंपल तय गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह खरे उतरे हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे ईंधन में मानक से कहीं अधिक इथेनॉल मिले होने की बात कही गई थी।

पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने सभी 893 नमूनों का विस्तृत परीक्षण किया। यह जांच भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के 'IS 17021' विनिर्देशों के तहत की गई, जहां इथेनॉल की मौजूदगी निर्धारित 19 से 21 प्रतिशत की स्वीकार्य सीमा के भीतर पाई गई।

कर्नाटक राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों और तीनों प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के पेट्रोल पंपों से एकत्र किए गए 56 सैंपलों में इथेनॉल का स्तर 19 से 20 प्रतिशत के बीच दर्ज हुआ, जिसका औसत 19.30 प्रतिशत रहा। केंद्र की यह रिपोर्ट कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के उस दावे का पूरी तरह खंडन करती है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य के कुछ रिटेल आउटलेट्स पर पेट्रोल में 26 से 31 प्रतिशत तक अत्यधिक इथेनॉल मिलाया जा रहा है।

तेल विपणन कंपनियों ने अक्टूबर 2026 में कर्नाटक सरकार द्वारा अपनाई गई सैंपल कलेक्शन और टेस्टिंग प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का तर्क है कि तय वैधानिक प्रक्रियाओं, सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी विवरणों का पालन किए बिना किसी भी निष्कर्ष की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती। OMCs ने स्पष्ट किया कि सितंबर के अभियान के दौरान जुटाए गए नमूनों को राज्य स्तरीय समन्वयक के जरिए अधिकृत कंपनी लैब में भेजा गया था, लेकिन अक्टूबर की पूरी कवायद कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल किए बिना ही कर दी गई। तेल कंपनियों को अब तक न तो संबंधित पेट्रोल पंपों की विस्तृत जानकारी मिली है और न ही लैब की आधिकारिक रिपोर्ट सौंपी गई है, जिसके चलते किसी भी निजी या थर्ड पार्टी लैब द्वारा जारी प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता संदेह के घेरे में है।